केवट भक्ति

हे केवट ! तेरे भाग्य पर इतराता हूँ

तेरी राम भक्ति पर शीश नवाता हूँ ।

कितने पुण्य कर्म किये थे तूने

साक्षात प्रभु राम तेरे घाट पे आते हैं,

जो भव सागर से नैया पार कराते हैं

कहते हैं हे केवट ! तू मुझे गंगा पार करा दे !

तू अपनी शर्तों पर उन्हें नचाता है

अपनी मनमानी करता है,

हर शर्तें तेरी प्रभु मानते हैं

जरा बता ! कौन सा गूढ़ रहस्य है ये ?

कितने जन्मों का तू पुण्य भागी है

क्या सत्कर्म किये थे तूने ।

जिन चरणों के चरण धूलि से

माँ अहिल्या उद्धार हुईं ,

उसी चरण धूलि को तूने धोया है

चरणोदक प्रभु का पान किया है ।

तार दिया परिवार सहित अपने पुरखों को !

हे केवट ! जरा बता मुझे

कौन सा ऐसा है भक्ति मार्ग

जिसका तूने अनुसरण किया है ।

तू एक पुण्यात्मा है, तू है आत्मज्ञानी

तू एक तपस्वी है, परमात्मा का है स्वरूप,

तेरी राम भक्ति को नमन हम करते हैं

तेरी केवट भक्ति की कामना करते हैं ।

जरा राम से अपने जाकर विनती कर दे

मेरी ओर भी ध्यान दिला, भवसागर पार करा दे,

संतप्त हृदय, विचलित मन है मेरा

इक बार प्रभु राम की कृपा करा दे ।

हे केवट ! तेरे भाग्य पर इतराता हूँ

तेरी राम भक्ति पर शीश नवाता हूँ ।

आप

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