क्या वास्तव में जमाना बदल गया है लेख

रोज़ तारीख बदलती है,रोज़ दिन बदलते हैंरोज़ अपनी उमर भी बदलती है,रोज़ समय का रंग बदलता है।हमारे नज़रिये भीवक्त के साथ बदलते हैंबस एक ही चीज़ हैजो नहीं बदलतीऔर वो हैं हम खुद।यही वजह है कि हमें लगता हैकि अब ज़माना बदल गया है।हर इच्छा पूरी हो,ये ज़रूरी तो नहीं।कुछ इच्छाएँ शेष भी रहनी चाहिए,जीने … Read more

हे माँ जगदम्बे

हे मां! हे माँ जगदंबे! हम शरण तुम्हारी आये हैं,मैया शरण तुम्हारी आयें हैं।कृपा अपनी बनाये रखना,हम केवल तेरे सहारे हैं।हे मां! हे माँ जगदंबे! नव रात्रि के इन नौ दिनों मेंधूम मची चहुंओर हैं।जहाँ भी जाओ हर गली में,माता तेरा शोर है।मन्दिर मन्दिर तेरे हो रहे जयकारे,हम शरण तुम्हारी आये हैं।जिसने भी की तेरी … Read more

मन का अन्तर्द्वन्द्व लेख

मन व्यथित है, चल रहा भीतर ही भीतर एक अन्तर्द्वन्द्व, आखिर क्या है जीवन का उद्देश्य?केवल वस्त्र, भोजन या आवास, या हवाई यात्रा, मौज मस्ती, सब कुछ तो ये अस्थायी है, केवल छलावा है , अचानक छिन जाता है एक दिन,जीवन भर की पूंजी अस्पताल में चली जाती है, पर फिर भी हाथ कुछ नहीं … Read more

गरीबी एक अभिशाप

उपहास गरीबों की मत करना वो भी होता एक इंसान हैपरिश्रम की रोटी खाता है उसका भी होता स्वाभिमान है ॥ गरीब गरीबी में जीता है अपने जीवन से संघर्ष करता है हाय गरीब की जो लेता है उसको फल ईश्वर देता है मिथ्या गुमान में कभी न रहना धन दौलत पर गर्व न करना … Read more

उतरे भीतर साँस की छोर

उतरे भीतर साँस की छोर,सार तत्व को ले हम निचोड़।प्रश्न उठता है – भीतर क्या है?भीतर भला हम क्यों उतरें?क्या लाभ है, क्या हानि है,कैसे जाने भीतर बिन उतरे?बाहर बाहर देख रहे हैं,बाहर की दुनिया चमकीली।इसी चमक में दुनिया पागल,भ्रमित घूम रहे गली–गली।जीवन मोती यदि चुनना है,लगाएँ गहरी डुबकी ज़ोर।उतरें भीतर साँस की छोर,सार तत्व … Read more

मिश्रित मुक्तक भाग एक 125

1 मानव मन की धौंकनी, देख प्रभू के हाथ तू तो कठपुतली मात्र है, तेरे कुछ नही हाथमत ग़ुरूर कर इतना हानिकारक होता अभिमान एक दिन जग से जायेगा, तू केवल ख़ाली हाथ ॥ 2 सच्चा साधक है वही हर पल करता प्रभु का ध्यानव्यर्थ की बातों में न उलझे न दिखाये मिथ्या शानअपना कर्म … Read more

हे नारी तू है नारायणी

हे नारी !!! तू ही है नारायणी✍️हे नारी !!! तू ही है नारायणी, तेरी शक्ति है अनंत अपार, तू ही है जीवन की धारातेरी धारा में बहकर इस जीवन की है नैया पार ।हे नारी !!! तू ही है नारायणी ! तू ही काली, तू ही दुर्गा तू नारायणी, तू जगदंबा है, तेरे हैं अनंत … Read more

लंका कांड हनुमान जी का मुक्का

तात स्वर्ग अपवर्ग सुख धरिय तुला एक अंग । तूल न ताहि सकल मिलि, जो सुख लव सत्संग॥हनुमान जी ने सत्संग का प्रभाव पूरी लंका पर डाला पर दो पात्रों पर उसका ज्यादा असर हुआ – 1. लंकिनी 2. विभीषण । 👉लंका में घुसते ही हनुमान जी की मुलाक़ात लंकिनी से हो जाती है मसक … Read more

ऐ ज़िंदगी जरा धीरे धीर चल गीत

ऐ ज़िन्दगी ! ज़रा तू धीरे-धीरे चलहर पल को जी लूँ, अमूल्य हैं हर पल.काँटो को साफ कर सुन्दर राह तू दिखा ज़िन्दगी को जीने का सलीका तू सिखा राहों में बिछा दे खुशियों के फूल तूदेखकर मन जाए जाए मेरा मचल ॥ हर पल को जीने का मज़ा लेंगे हमखुशियों के फूलों को देख … Read more

अकेला चलो गीत

अकेले आये हो, अकेला चलोमिले जो प्रेम से पथ में, उन्हें गले लगाते चलोमत सोचो लोग क्या कहेंगे अच्छा था या बुरा, सच्चाई की राह पर मिलती हैं अड़चनें घबड़ाना नही, सच्चाई की राह छोड़ना नही, कोई साथ चले या न चले , अकेला चलो । जब दिल से प्यार होता है पचीस तरीक़े मान … Read more