कच्ची माटी के दिये, बेंच रहा कुम्हार ।
मोलभाव की रार से, बेचारा लाचार ॥
भाव लगाते मूर्ति का, जिसको पूजे आप ।
ईष्ट का सौदा करें, पुण्य मिला या पाप ॥
होटल बिल भुगतान में, कभी न देखते बिल ।
करता माँग गरीब है, टूट जाता है दिल ॥
ग़रीब की तो ज़िन्दगी, होती एक अभिशाप ।
हाय कभी मत लीजिए, बहुत बड़ा ये श्राप ॥
गरीब का परिवार तो, जो पाये वह खाय ।
समृद्ध वान आप हैं, कभी न लीजे हाय ।