झाड़ी बोलती है

इक झाड़ी को देख रहा था झाड़ी मुझसे कहती है क्यों डरते हो तुम मुझसे कि मेरे अंदर काँटे हैं मत डरो मेरे काँटों से ये मेरी सुरक्षा करते हैं आओ बैठो मेरे पास मन की शांति मैं तुमको दूँगीस्वादिष्ट फल हैं मेरे पास उनको खाने को दूँगी ।पर तू मानव तो बहुत चतुर है … Read more

धरती की चेतावनी

धरती की चेतावनीधरती हिल रही है,पर हम बेख़ौफ़ हैं,व्यंग कर रहे “ये होता है!”पूँछते “कितने रिक्टर की तीव्रता थी?”छः से नीचे थी?अच्छा, तो बात नहीं,ये घातक नहीं!चुप हो जाते हैं,सोचते “ये होता रहता है”नहीं समझना चाहते ये एक चेतावनी है प्रकृति की ओर से!हे मूर्ख मानव!संभल जा ज्यादा अत्याचार मत कर!!पर मानव तो महा ज्ञानी,बड़े-बड़े … Read more

धरती की पुकार

धरती की पुकारधरती हूँधारण करती हूँ, पालती हूँ, पोसती हूँ,इसीलिए तो मैं धरती माँ कहलाती हूँ।पर अब थक गई हूँअपनों के ही पाप ढोते-ढोते।छोड़ गए राजा परीक्षित भी मुझे असहाय,कलि के प्रकोपों को सहने के लिए।गौ रूप में भी सुरक्षित नहीं,सरेआम कटती हूँ,किससे कहूँ अपनी वेदनागौ चारे और जल के बिना मरती हूँ।अतिक्रमण, दोहन, प्रदूषण,छलनी … Read more

सूखी डाली का हरियाली से संवाद

एक डाल पड़ी थी, सूखी सी,बोली हरियाली से “बहना! मुझे अपने पास बैठने देना,मेरा तिरस्कार मत करना।”“तुम जैसी थी मैं हरी भरी,खूब प्रफुल्लित रहती थी।तूफान का एक झोंका आया,मुझे तोड़ कर चला गया।”“लोग तुझे ताकते रहते हैं,मेरी तरफ मुँह नहीं फेरते हैं।तू तो हो मेरी प्यारी बहना,मुझसे तुम अलग मत होना।”बोली हरियाली “सुनो प्रिय बहन,तुम … Read more

ढलती शाम गीत

मैं ढलती सी शाम अंधेरों से डरती हूँ, कभी मिले फुर्सत के पल बेटा, आ जाना मिलने को ॥मेरा बुढ़ापा अकेलापन मुझे डराता है मैं मरने से नहीं डरती यह तो शाश्वत सत्य हैकोई अमर पद पाकर इस दुनिया में कहां आता है मुझे चाहिए तेरा साथ अंधकार से डरती हूँ कभी मिले फुर्सत के … Read more

मेरी प्यारी चिड़िया

ऐ चिड़िया ! ऐ चिड़िया ! ऐ मेरी प्यारी चिड़िया इधर उड़ी उधर उड़ी फुदक रही मेरी चिड़िया ..डाल पर बैठी मेरी चिड़िया मुझको तकती रहती है मैं इसे निहारा करता हूँ वह मुझे निहारा करती हैचीं चीं चीं चीं है करती प्रेम प्रदर्शित करती मेरी चिड़िया छोटी सी चुनमुन सी ये दिखती है मेरी … Read more

आ जाओ मेरी गौरैया

आ जाओ मेरी गौरैया ..२ घर के मुँडेर पर बैठी गौरैयाचीं चीं करके पास आ जाती कहाँ गयी वो.. नन्हीं जान यादें उसकी ..मुझे सताती .ठहरी ये तो नादान एक पंक्षी क्रूर दुनिया से रही.. अन्जान विलुप्त हो गयी प्यारी गौरैया नाराज़गी किससे.. बतलाती तिनका तिनका जोड़ती रहती घर में ही कहीं घोंसले बनाती भोजन … Read more

सूर्य देव और धरा

कौन-सी है भला प्रीत तेरी,रंग-रंगीली रीत तेरी।धरा से मिलन की चाह में,बंधी है जैसे प्रेम डोरी॥भोर होते ही उदय हो जाते,लालिमा बिखेर धरा को सजाते।गगन से उतर चूमते क्षितिज,सुनहरी करतीं रश्मियाँ धरित्री को॥श्रृंगारी हो जाती ये धरती,तेरी किरणों की सौर साड़ी ओढ़ी,पिया-मिलन को आतुर जैसी,गाँव की गोरी, शर्मीली, जोड़ी॥कौन-सी है भला प्रीत तेरी,रंग-रंगीली रीत तेरी।धरा … Read more

प्रकृति संरक्षण

प्रकृति संरक्षण ✍️प्रकृति का दोहन करने वालों, जरा सजग तुम हो जाओ कहाँ पाओगे शरण भला, एक बार ध्यान इस पर दे दो प्रकृति है तो जीवन है, अन्यथा भूमि कंकड़ और पत्थर है हरियाली है इसकी धड़कन, धड़कन पर न तुम घात करो जल वायु मिलती है प्रकृति से, जो जीवन का है केन्द्र … Read more

सितारों तुम जमीं आओ

सितारों तुम ज़मीं आओ, दूर से ही चमकते हो निर्निमेष निहारता हूँ बहुत प्रिय तुम लगते हो। ढूँढता हूँ स्वजन अपने, तुममें ही वे कहीं होंगे छिपाओ न तुम उनको, वे भी तो व्यथित होंगे कहाँ पर लोग जाते हैं निशाँ कोई नहीं दिखता झिलमिलाते हो तुम ऐसे, स्वजन मेरे लगते हो । जीवन ये … Read more