झाड़ी बोलती है
इक झाड़ी को देख रहा था झाड़ी मुझसे कहती है क्यों डरते हो तुम मुझसे कि मेरे अंदर काँटे हैं मत डरो मेरे काँटों से ये मेरी सुरक्षा करते हैं आओ बैठो मेरे पास मन की शांति मैं तुमको दूँगीस्वादिष्ट फल हैं मेरे पास उनको खाने को दूँगी ।पर तू मानव तो बहुत चतुर है … Read more