मेघ दोहे

धरती सारी तप रही, मेघ हुए नाराज ।सुबह आती शाम गयी, रोज़ रोज़ का काज ॥जीवन दूभर हो गया, घर बैठे दिन रात ।विपदा किससे हम कहें, सबकी एक ही बात ॥ विनय करूं वंदन करूं, हे इन्द्र महाराज । दया करो हम पर जरा, आ बरसो सुर राज ॥ इंतज़ार हम कर रहे, हे … Read more

धरती की वेदना

धरती हूँ , धारण करती हूँ, पालती हूँ पोसती हूँ इसलिए तो धरती माँ कहलाती हूँ पर अब थक गयी हूँ , अपनों के ही पाप ढोते ढोते, छोड़ गये राजा परीक्षित भी मुझे असहायकलि के प्रकोपों को झेलने के लिए ।गौ रूप में भी सुरक्षित नहीं सरेआम कटती हूँ, किससे कहूँ अपनी वेदना गौ … Read more

झुलसती धरती

प्रकृति का दोहन करने वालों,जरा सजगतुम हो जाओ।नहीं पाओगे शरण कहीं,न कोई तुम्हें बचाएगा।प्रकृति ही तेरी रक्षक है,प्रकृति ही तेरी भक्षक भी।खिलवाड़ न करो उससे अब,नहीं तो दाह में भस्म हो जाओगे।हरियाली से तुम हो अनजान,क्यों नयन तुम्हारे तरसते हैं?तू साफ़ कर रहा वृक्ष‑समूह,कहाँ फिर तुझे छाँव मिलते हैं?वृक्ष काटना नहीं छोड़ रहे,समझ रहे हो … Read more

कोयलिया भाव गीत

कोयलिया! तू कितनी प्यारी,तेरी बोली मधुर सुहानी,तेरे सुर में जादू बसता, हर डाली पे तेरा गाना! रंग तेरा काला भले हो, बोली तेरी मतवाली है,तेरी तान सुनकर कोयलिया,प्रकृति भी मुस्कराती हैपर जब तेरी कथा सुनी मैं, मन भीतर कुछ टूटा है,तू अपने अंडे नहीं सेती, कौओं के घर छोड़ा है। कहाँ गया तेरा मातृत्व,कहाँ तेरी … Read more

वट वृक्ष

साक्षात तुम देव तुल्य लगते हो बैठा था एक दिन जीवन की आपाधापी से दूर एक बूढ़े बट वृक्ष की शीतल छाँव में अद्भुत, असीम शांति पूँछ बैठा बूढ़े वृक्ष से इतनी शीतलता कहाँ से लाते हो ?अनगिनत जीवों को बसेरा देते हो खाने के लिये फल देते हो बदले में कुछ भी तो नहीं … Read more

मैं और मेरी चिड़िया

मैं और वो मेरी चिड़िया दोनों घंटों बातें करते हैं वह डाल पर बैठी रहती है मैं छत पर बैठा रहता हूँ..छत पर बैठा योगा करने ध्यान मेरा भंग हो रहा टुकुर टुकुर ताकती रहती है प्रेम प्रदर्शित करती है मुझ पर ही नज़र गड़ी उसकी आकृष्ट मुझे वो करती है मैं उसे देखता रहता … Read more

पुष्प की अभिलाषा

हे माली ! चुन लो मुझे देर करो न कहीं डाल से गिर न पड़ूँ मैं तुम्हारी माला में गुँथ जाऊँ प्रभु के श्री चरणों में चढ़ूँ मैं जाने कब दिन बीत जायेगा घन घोर अंधेरा घिर जायेगा प्रभु पूजा की बेला तब तककब चुपके से निकल जायेगी । अपने में सुन्दर रंग रूप धरा … Read more

आया सावन मनभावन

बरसे सावन बादल गरजे काले मेघ हैं नभ में छाये झूम झूम के पानी बरसे आया सावन मनभावन । हरियाली प्रकृति में छायीनयनों को अभिराम दे रहीमदहोश कर रही है बारिश मयूर नृत्य कर रहे वन वन ।सर सरिता फूली न समातीभरी नीर से कंठ गले तक उफान मार रही रह रह कर तोड़ चली … Read more

ओस की बूँद

हरी हरी घासों पर सुबह फैली ओस की बूँदे,क्षण भर के लिये ही सहीनैसर्गिक सौंदर्य बिखेर रही।बिखरी मोती के दाने जैसे ओस की बूँदे लुभा रही, कर रही शांति प्रदान मन को प्रफुल्लित कर रही ।जीवन अस्तित्व क्षण भर का सूर्य की ताप रश्मियों तक,विलुप्त हो जायेगी वे पर परवाह न कर रही ।सूर्य एक … Read more

बसंत

ऋतुओं की रानी मैं बसंत हूँ फूलों में हूँ मैं कलियों में खेत खलिहानों में मैं दिखती,दिखती हूँ हर गलियों में ॥ कलियाँ कलियाँ हैं मुस्काई सुगंधित फूल खिले बन उपवन कुसुमित किंसुक के फल सुन्दर प्रकृति प्रमुदित प्रफुल्लित मन । पक्षी गाते गीत मनोहर कलरव करते हैं मस्ती में बसंत की नयी ऊर्जा दिखती … Read more