वट वृक्ष की डाली

टूट जाती जैसे इंसान की बाँहें,टूट गयी वट वृक्ष से डाली, क्या करती कुछ समझ न पायी, अलग हुई वट से वह सुन्दर डाली । हरे भरे पत्तों की घनी वह डाली हर इंसान को छाया देती थी,पर इंसान की छुद्र पिपासा ने, काट दिया वृक्ष की वह डाली ।हाथ पाँव यदि कट जाये इंसान … Read more

ऋतुओं की रानी वसंत

ऋतुओं की रानी मैं तो वसंत हूँ फूलों में मैं हूँ कलियों में मैं हूँ खेत खलिहानों में मैं हूँ मैं तो वसंत हूँ ।इधर घूमती हूँ उधर घूमती हूँ बड़ी बावली हूँ न कुछ फ़िक्र है न किसी का डर है मैं तो वसंत हूँ ।पतझड़ ही मैं हूँ नव सृजन भी तो मैं … Read more

कोयल बोले

मनमोहक वायु डोल रही है ,डालों को झकझोर रही है ,आम के घने पत्तों में छिपी बैठी है काली कोयल बोल रही है । रंग रूप से तो काली है पर बोली उसकी निराली है फुदकती है वह डाली डाली,मीठे आम में मिश्री घोल रही है ।कौआ कोयल तो एक जैसे हैं,देखने में समान ही … Read more

बया का घोंसला

ए मेरी प्यारी चिड़िया, किस विश्वविद्यालय से पढ़कर तू आयी है जो ऐसी दक्षता पायी है ?कितना सुन्दर, कितना अनुपम,प्यारा सा तेरा यह घोंसला है किन रेशमी तारों से यह सब बुनती है किस नट बोल्ट से तू कसती है । तूफ़ानों के झंझावातो को भी झेलने की क्षमता इसमें होती है धूप, हवा और … Read more

प्रकृति का सानिंध्य

प्रकृति का सानिध्य मुझे बहुत ही भाता है..ऊँचे ऊँचे पर्वतों से आच्छादित विस्तृत हरित वन गर्भ में झीलों का मनोहारी परिदृश्यनीरव निर्जन, शुद्ध वातावरण शांति और स्थिरता शीतलतासुन्दर पर्यटन स्थल श्रृषि मुनियों की पावन मनभावन तपस्थली प्रकृति का मानव को एक अद्भुत वरदान । प्रकृति का सानिध्य मुझे बहुत ही भाता है ।पक्षियों की चहचहाहट … Read more