होली पर दोहे

फाल्गुन महिना आ गया, होली का हुड़दंग।मस्ती में सब हो गये, मन मयूरी तरंग॥ पीली सरसों खिल उठी, टेसू दहके डार।गांव गलियाँ गूंज उठी, रंगों की झंकार॥ढोलक बोले थाप पर, मंजीरा दे ताल।अबीर उड़त गगन चढ़े, रँग गया भू-भाल॥छत पर थी नव संगिनी, नयन पथ रहि निहार।कब आयेगें साजना, ले के फागुन हार ॥होली पे … Read more

हम तो चले स्वदेश

हे बोथल के प्रिय मित्र मेरे, बहुत कर ली यहाँ पहुनाई ।वापस चल आज मेरे भाई स्वदेश चलने की घड़ी आई ॥ख़ूब गाने हुये,बजाने हुये,चुटकुले हुए, खूब ठहाके लगे मन हुआ खूब आह्लादित आप मित्रों संग ख़ुशियाँ मनाई खूब जश्न किया, खूब मस्ती हुई, खूब हुई स्वागताई वापस चल मेरे भाई स्वदेश चलने की घड़ी … Read more

बचपन के वे दिन

जो बीत गये सो बीत गये वो दिन वापस नहीं आते पर बचपन के वो दिन सुहाने याद बहुत आते …बचपन के दिन, सुहानी स्मृतियाँ,बीत गये सो बीत गये, वो दिन वापस नहीं आतेउठते भोर, योजना बनाते दोस्तों संग,खेलते खूब, सुन्दर थी वो अनमोल पल की बातें .. न करते चिंता, क्या खायेंगे, क्या पहनेंगे,खूब … Read more

बीती घड़ियाँ

मैं सुन रहा केवल चुप होकर, तू चाहे जो कुछ कह लेक्यों दिख नहीं रही वह चंचलता, जो थी तेरी पहलेमधुर और कष्ट पूर्ण भी हैजीवन की बीती घड़ियाँ क्या लाभ हानि तू जोड़ रहीबैठी अब बिखरी कड़ियाँ जो बीत गया सो बीत गया मन में न बांध गाँठे दग्ध हृदय की वेदना धीरे धीरे … Read more

बचपन की पगडंडियाँ

खड़ा हुआ हूँ गाँव के इक छोर पर, देख रहा हूँ गाँव का बदला बदला स्वरूप ।ढूँढ रहा हूँ अपने बचपन की पगडंडियों कोजिन पर मैं चलता था जिन पर मेरा बचपन बीता था । कहाँ गयी वे पगडंडियाँ कहाँ गया वह बरगद का वृक्ष, जिनकी छाँव में बैठा करता था खेला कूदा करता था … Read more

ई सावन मह बुलाइ ला भइया

ई सावन मह बुलाइ ला भइया जब से ब्याह भयउ पारे माछूट गइल मोरा बाबुल घर भइयाअबकी बरस मंगाइ ला हमकाई सावन मह बुलाइ ला भइया अंबुवा तरे झुलवा डलवाइ कैसखियन संग मोहि झुलाय द भइया रिमझिम पड़इ सावन की फुहरिया बचपन कइ याद दिलाय द भइया बाबुल के आँखों की पुतरी बचपन संग संग … Read more

दोस्त की यादें

ऐ दोस्त !एक मलाल है तुझसेपर कहूँ कैसे तू तो मेरे बीच अब नहीं रहा ..क्यों पाले था वैमनस्यता ज़िन्दगी अकेले जीता रहा भूल गया वो बचपन जो साथ साथ खेले थे अहम् में जीता रहा मैं बड़ा हूँ मैं हूँ स्वयंभू तुझे बचपन का दोस्त भी न दिखा उससे भी दग़ाबाज़ी करता रहा एक … Read more

बचपन की कहानी

बीते समय की हुई अब कहानी बड़ी ख़ूबसूरत थी वह जिन्दगानी । कड़ी धूप में अपने घर से निकलना जूते न चप्पल चुपके से खिसकनारास्ते में उड़ती तितलियों को पकड़ना फड़फड़ाती उन्हें देख हवा में उड़ाना काग़ज़ की नैया उसे पानी पर तैराना चींटों को शरारत से उस पर बैठाना बड़ी ख़ूबसूरत थी वह ज़िन्दगानी … Read more

मां की यादें

माँ तू मेरा चित्त चुराती है देर रात नींद नहीं आती है जब जब दुखी मैं होता हूँ तू मेरे सपनों में आती है ।मुझको बहुत समझाती है थपकी देकर तू सुलाती है मैं छोटा मुन्ना बन जाता हूँ मुझे लोरी गाकर सुनाती है ।जिस दिन तू नहीं दिखती है भीगी पलकों में मैं सोता … Read more

पुरानी यादें हैं यादो का क्या भाग आठ

यादें हैं यादों का क्या जहन में मेरे बने रहती हैं.अक्सर याद आता है मुझे बचपन का वही पुराना घर बड़ी बडी चौपाल घर की कच्ची दीवालें और छप्पर छत थी टपकती तो क्या हुआ आत्मिक आनन्द उसमें मिलाआत्मीयता उसमें ही थी घुली जान छिड़कता था परिवार पर चौखट पर बैठी मेरी आजी करती रहती … Read more