हम तो चले स्वदेश

हे बोथल के प्रिय मित्र मेरे, बहुत कर ली यहाँ पहुनाई ।

वापस चल आज मेरे भाई स्वदेश चलने की घड़ी आई ॥

ख़ूब गाने हुये,बजाने हुये,चुटकुले हुए, खूब ठहाके लगे

मन हुआ खूब आह्लादित आप मित्रों संग ख़ुशियाँ मनाई

खूब जश्न किया, खूब मस्ती हुई, खूब हुई स्वागताई

वापस चल मेरे भाई स्वदेश चलने की घड़ी आज आई ॥

ख़ूब यात्रायें हुई,खूब मन्दिर गये, संग संग गुरुद्वारे गये

खूब पाटलक हुए लज़ीज़ व्यंजनों की हुई खूब छकाई

मातृभूमि की पावन मिट्टी ने अपनी सुगंध आज फैलाई

वापस चल मेरे भाई स्वदेश चलने की घड़ी आज आई ॥

भारतीय संस्कृति का गौरव बढ़ा हिंदी का मान बढ़ाया

काव्य गोष्ठियाँ हुई,कविताएँ पढ़ी, तहेदिल से सुनाया

शुक्रिया दोस्त ! आपने की खूब मेरी हौसला अफजाई

वापस चल मेरे भाई स्वदेश चलने की घड़ी आज आई ॥

दिल पुकारे यही, लोग यूँ ही आते रहे और जाते रहें

बोथल परिवार का यह कांरवा यूँ ही आगे चलता रहे

मिलेंगे फिर मिलेंगे आपके दिल में रहेंगे ऐसी है मिताई

वापस चल मेरे भाई स्वदेश चलने की घड़ी आज आई ॥

आप सभी गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ !

जय हिंद ! जय भारत 🇮🇳💐💐💐🌷🌷🌷🙏🙏

अमेरिका से

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