यादों का कारवाँ

चलते चलते यूं ही कहां आ गए हमज़िन्दगी के ढलान पर खड़े हो गये हम,जीवन की आपाधापी में समय फिसल गया है कहाँ से चले और कहाँ आ गये हम । मृगतृष्णा के पीछे भागता ही रहा हूँ उलझता रहा सतत संघर्षों में जीवन,इच्छायें बहुत हैं पूर्ण कर पाया न कोई आत्मिक संतुष्टि कहां खो … Read more

बीता समय

जो बीत गया सो बीत गयाक्षण वह वापस कहाँ आता है, स्मृतियाँ ही तो ऐसी है जो मन में सदा जीवित रहती है । खट्टी मीठी जैसी भी होंस्मृतियाँ तो मानव जहन में रहती है,नहीं जाती हैं लाख भुलाये अपना अहसास कराती हैं ।बीता जीवन अनुभवों का एक भरा पिटारा होता है,सीख देता है ज़िन्दगी … Read more

सूनी कोठी

सूनी कोठी करे पुकार आओ बच्चों मिलने इक बार.महल खड़ा हुआ आलीशान ऊँची चोटी भव्य महानरहते केवल दो ही जान पड़ोसियों से भी न पहचानदो वृद्ध अकेले घर में रहते आशा में जीवन हैं जीते बच्चे इक दिन आयेगे कोठी को जगमगायेंगे सूनी कोठी करे पुकार आओ बच्चों मिलने एक बार । संवेदनायें हो गयी … Read more

कहाँ गयी चिट्ठियाँ

लुप्त हो गयी वह इतिहास के पन्नों में.प्यारी चिट्ठियाँ…छोटा सा पीला पोस्ट कार्ड, नीली अन्तरदेशी लिखने का ज़बर्दस्त सलीका.जिसकी शुरुआत होती थी “ऊं गणेशाय नमः “ ऊं परमात्मने नमः से.परम पिता परमेश्वर की असीम कृपा से यहाँ सब कुशल है आशा है वहाँ पर सब कुशल से होगे .भगवान की कृपा सब पर बनी रहे.चिट्ठी … Read more

पुरानी यादें हैं यादो का क्या भाग सात

पुरानी यादों की सातवीं श्रृंखला में चर्चा घर आये पाहुन की आज हम करते हैं पुरानी यादें साझा करते हैं अतिथि घर में आते थे “अतिथि देवोभव “ का आदर पाते थे ख़ूब आदर सत्कार किया जाता था देव तुल्य उन्हें समझा जाता था परिवार के सदस्य समान वे रहते थे घुलमिल कर वे रहते … Read more

पुरानी यादें हैं यादों का क्या भाग छ

पुरानी यादों की छठी श्रृंखला में ननिहाल की चर्चा आज हम करते हैं पुरानी यादें साझा करते हैं नाना नानी के घर की तो बात ही क्या कहने जितनी भी चर्चा करे सब कम ही तो लगता है हर बच्चे उतावले रहते हैंनानी के घर जाने को तत्पर रहते हैं भगवान जाने यह कैसा बंधन … Read more

पुरानी यादें हैं यादो का क्या भाग पांच

पुरानी यादो की इस पाँचवीं श्रृंखला में चर्चा संयुक्त परिवारों पर आज हम करते हैं और पुरानी यादें ताज़ा करते हैं बाबा जी और आजी जी, दादा जी और दादी जीछोटे पिताजी, बड़े पिताजी, मंझले पिताजी, बड़ी अम्मा जी, छोटी अम्मा जी, मँझली अम्मा जी, ढेरों काका जी और काकी जी, भैया जी और भौजी … Read more

पुरानी यादें हैं यादो का क्या भाग चार

पुरानी यादों की चौथी श्रृंखला में चर्चा दोस्तों की हम करते हैं कुछ पुरानी मधुर स्मृतियों का ज़िक्र इस पटल पर करते हैं छः दशक से ऊपर कब बीत गये समय पंख फैलाए फिसल गयेसमय कहाँ पर रुकता है यह तो सतत चलता रहता है इसका आदि अंत नहीं होता है यह सब कुछ देखता … Read more

पुरानी यादें हैं यादो का क्या भाग तीन

स्मृतियों के पुराने पन्नो को आज हम थोड़ा पलटते हैं अपने समय के शादी विवाह के क़िस्सों की कुछ चर्चा हम करते हैं देवोत्थानी के आते ही देखुवा घर घर आ टपकते थे गाँव गाँव में आठवी से बारहवीं में पढ़ रहे बच्चों की टोह लगाते थे घर में ज़मीन जायदाद, बैलों की जोड़ी और … Read more

कहाँ गये वो गांव

भ्रमण पर निकला थागाँव के इस छोर से उस छोरदेखकर भौचक रहा कुछ भी तो न दिखा कहाँ गये वे छप्पर सारे,कहाँ गये कच्चे, वातानुकूलित सब घर मेरे प्यारे, कहाँ गयी दोस्तों की वह शाम की महफ़िल गपशप और हंसी ठिठोली, कहाँ गयी दादा दादी की बैठक, कहां गया सब स्वजनों का प्यार, सब कुछ … Read more