समय भागता आगे आगे

समय भागता आगे–आगे,

हम चलते धीमी चाल,

साँसें कहतींरुक कर चल ले,

मेरा भी तू रख ख्याल।

तन बूढ़ा, पर मन जवाँ है,

कहता हैदौड़ लगा ले आज,

साँसें बोलींमुझे भूल गया?

धड़कन चलती है बेताल।

समय-समय का फेर है भाया,

कभी तेज़, कभी सुस्त हुई चाल,

समय को कौन बाँध पाया है,

ऋषि-मुनि तक हुए बेहाल।

जीवन-रथ पर चल निकला हूँ,

कितनी शामें, कितने सवेर,

धूप मिले या घना अँधेरा,

रुक न सकी अब तक यह चाल।

ठोकर खाकर भी हौसलों ने,

आगे बढ़ना सिखलाया,

पैर पीछे जब नहीं हटे,

अब क्यों थामूँ अपनी चाल?

समय भागता आगे–आगे,

हम चलते धीमी चाल,

साँसें कहतींहर क्षण जी ले,

जीवन है अनमोल मिसाल।

कितने साथी राह में बिछुड़े,

कितनी यादें बनीं ढाल,

यादों की उस पगडंडी पर

आज भी गूँजता रसताल।

अब हर पल को जीना चाहूँ,

कोई क्षण जाए न खो,

समय न ठहरेमन यह कहता,

कदमों में रहे सदा ताल।

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