ऐ जिंदगी जरा ठहर जा रे

ऐ ज़िंदगी, ज़रा ठहर जा रे,काहे भागे अंधी चाल।मन का दीपक काँप रहा है,तेल न बचा, बाती ढाल॥तन तो चलता हाट-बाज़ार,मन बैठा सूने घाट।भीतर शोर, बाहर सन्नाटा,कौन सुने मन की बात॥मैं तो बँधा तेरी डोरी में,तू ही मेरी साँस।तू बिन सूना देह-नगरिया,टूटे हर विश्वास॥तन पर बोझ न दिखे ज़्यादा,मन पर पहाड़ समान।हँसत-हँसत थक जाता जीव,कहाँ … Read more

नाटक समझ के जीना रे मन

नाटक समझ के जीना रे मन, यह संसार है खेल।जब तक चलती साँसें हैं , निभा ले अपना मेल॥ आज हो, कल नहीं रहोगे, पल में जाता कालक्षणभंगुर है तन का मेला, सबका यही है हाल प्रभु ने जितनी डोर थमाई, उतना ही चलती रेलनाटक समझ के जीना रे मन, यह संसार है खेल॥तुम तो … Read more

मौन से आया मौन मैं जाऊँ गीत

आया था मैं मौन ही, जाऊँगा भी मौनबीच की इन साँसों में, गूँजे जीवन-गौन, क्षण भर की ये यात्रा बस, पल भर का ये गांवआया था मैं मौन ही, जाऊँगा भी मौन ॥खुशियों के दो फूल मिले, दुख के काँटे हजारफिर भी मन ने थाम लिया, हर पल प्रेम-उधार, मिलना बिछड़ना धर्म रहा, खेल यही … Read more

चल कर्म की राह चल

चल कर्म की राह चल, हार से मत डर ऐ मन,जो जैसा बोए बीते पल, वैसा ही पाता जीवन ॥×2इस दुनिया रूपी सरिता में बहना ही पड़ता,दुख हो चाहे सुख हो जीना ही पड़ता।भाग्य तभी बनता संबल, जब श्रम बरसे सावन,जो जैसा बोए बीते पल, वैसा ही पाता जीवन ॥नियति लिखी सही मगर, बदलती हिम्मत … Read more

जीवन सत्य गीत

जीवन इक धारा है, धारा है बहता आए बहता जाए,आता रहता जन्म नया, इसी में डूबे उतरायेजीवन इक धारा है।।छुरी गले पर चल रही, फिर भी दया न आज,अहम् में जीवन जी रहा, जैसे हो स्थायी राज।ईश्वर की सृष्टि में, सबको समान अधिकार निर्बल पर जो दया करे, वही सच्चा कृपाण।।मरते प्रतिदिन लाख यहाँ, सब … Read more

चूड़ामणि गीत रूप

सागर में हलचल जगी, निकले रत्न हजार वहीं जन्मी चूड़ामणि, न्यारी थी उपहार ॥ ×2नन्दिनी हुई मोहित हरि पर, बढ़ा प्रेम अपार,सागर ने अर्पण में दी थी, मणि अमर उपहार।इन्द्र देख रह न पाए, चितवन में अनुराग हरि ने देकर इन्द्राणी को, किया अतिथि सत्कार ॥🔸 दोहराव: सागर में हलचल जगीशम्बर रण में संकट छाया, … Read more

मेरे मन की बात

कभी-कभी पीछे मुड़कर देखता हूँ,तो लगता हैमेरे जीवन की पगडंडी परकितनी धूप बिखरी, कितनी परछाइयाँ चलीं,कितनी हँसियाँ खिलीं और कितने आँसूचुपचाप मेरी पलकों पर मोती बनकर सूख गए।बचपनवह जैसे हवा का एक झोंका थाछूकर भी न पकड़ में आता।मिट्टी में खेलते हुए जो हँसी गिरे थे,वे आज भी दिल के किसी कोने मेंधड़धड़ाते दिल की … Read more

बदलते समय का पालन पोषण

पहले बच्चों का पालन-पोषणसंवेदना और सादगी का संगम था जहाँ ज़रूरतें सीमित थीं,पर अपनापन असीम।आज का पालन-पोषणसुविधाओं की सूची बन गया है।बच्चा पैदा होते ही बीमा चाहिए,महँगे खिलौनों से भरा कमरा चाहिए,ए.सी. वाला नर्सरी रूम,हर त्योहार पर नया परिधान,और स्कूल की फ़ीस लाखों में मापी जाती है।अब बचपन भी ब्रांडेड हो गया है।हमारे समय में … Read more

मत डरा मुझे हे मृत्यु काल

मत डरा मुझे हे मृत्यु-काल !! मत डरा मुझे हे मृत्यु-काल,मैं अजर हूँ, अमर हूँ, निडर बेहाल।तेरा शासन तन तक सीमित,मैं आत्मा हूँ असीम विशाल।।तू क्या मुझे मिटा सकेगा, मैं तो सत्य की ज्वाला हूँ।भस्म भले यह देह हो जाए,पर मैं हरि का उजियाला हूँ।।शक्ति हूँ मैं, शिव का अंश हूँ, मुझमें जीवन का संचार।मृत्यु … Read more

गीत कर्म का दीप

हे प्रभु! न किसी को पीड़ा दूँ, न मैं कोई पाप करूँ,मानव तन पाया जो मैंने, पूर्ण सार्थक इसे करूँ॥न हो किसी को पीड़ा मुझसे, ऐसा जीवन बीते,मानव तन पाया है जो, सत्कर्मों में ही रीते।ना प्रसिद्धि की चाह रहे, ना ईर्ष्या मन में धरूँ सत्य-अहिंसा के पथ पर मानव धर्म मैं करूँ॥दीन-दुखियों का साथ … Read more