Bhakti
कान्हा मुक्तक
कान्हा कान्हा मन पुकारे, कान्हा में मन रमता हैकान्हा की मोहिनी सूरत पर, दिल मेरा जा टिकता है ठुमक ठुमक कर कान्हा भागे, माँ यशोदा पीछे धायेनंदबाबा टुकुर-टुकुर निहारे, ठुमकना अच्छा लगता है ।कान्हा की लीला है न्यारी, व्याकुल दौड़ती गोपियाँ सारीकान्हा मुरली की तान सुनावें,मंत्रमुग्ध हुई है प्रकृति सारी कान्हा वन में गाय चराते, … Read more
राधे कृष्ण भजन
आओ श्याम न करो देर श्री राधे बाट निहार रही,महा रास की बेला आ पहुँची सखियों संग बाट निहार रही ।चंदा सी शीतल चाँदनी में सखियों संग राधे विराज रही,फूलों से बगिया महक रही यमुना भी लहरें मार रही । कोई कुंज निकुंज संवार रही कोई राधा जी को निहार रही, कोई हाथ में मेंहदी … Read more
राधे राधे भजन
जपे जा राधे राधे दौड़े आयेंगे कान्हा .वह ग्वालिन बरसाने वाली उसका नाम है राधा, वह तो है वृषभान दुलारी उसके पीछे भागे कान्हा ।राधा रानी मोहिनी तो मोहन हैं कान्हा राधा रानी चूड़ी तो कंगन हैं कान्हा ।राधा रानी मुरली तो तान है कान्हा राधा रानी सागर तो तरंग है कान्हा । राधा रानी … Read more
प्रभु तेरे चरणों में भजन
प्रभु तेरे चरणों में मन मेरा लागाहर क्षण हर पल उमगत अनुरागा ॥जिन चरणों के चरण रज पाकरगौतम पत्नी अहिल्या तरी थी पायी मुक्ति पति घोर शाप से उन पद पंकज में मन मेरा लागा ॥जहां राम मेरे धरती पर थे सोये कुश पल्लव का बिछौना बिछाये सिरहाने की तकिया हाथों की बनाये उस धरा … Read more
कहाँ मैं ढूँढू कहाँ मैं पांऊ भजन
खोजूँ कहाँ मैं पाऊँ कहाँ पर नहीं पता मैं जाऊँ कहाँ परकोई कहे मथुरा कोई कहे काशी कोई कहे प्रभु मेरे हैं अविनाशी ।कोई ढूँढता है प्रकृति में कोई संगीत में पाता हैकोई ढूँढता मन मन्दिर में प्रभु दर्शन के सब अभिलाषी । प्रभु तो है सर्वत्र समाना वेद पुराण कहे यही जानाप्रभु तो हैं … Read more
उठाया गोवर्धन चक्रधारी ने
उठाया गोवर्धन चक्रधारी ने अपनी एक ऊँगली के बल पर,पर चुना क्यों कनिष्ठा को उसकी सुन्दर कथा सुनाता हूँ ।कान्हा ने पूँछा ऊँगलियों से किस ऊँगली का प्रयोग करूं, सब रखो पक्ष अपना अपना निर्णय स्वयं तब मैं करता हूँ ।अंगूठा बोला सबसे पहले प्रभु मैं एक नर बलशाली हूँ, बाक़ी तो हैं केवल अबलायें … Read more
उठो द्रौपदी वस्त्र सँभालो
उठो द्रौपदी वस्त्र सँभालो चक्र धारी अब नही आयेंगेतुम्हीं को लेना होगा लोहा इन नरभक्षी इंसानों से ।छोड़ो मेंहदी भुजा सँभालो खुद ही चीर बचाओ अपनीबन जाओ तुम रण चंडी भिड़ जाओ अब तूफ़ानों से ।कब तक आस लगाओगी कृष्णा पुकार पर दौड़े आयेगे यह तो द्वापर युग नही है न ही रथी अब महाभारत … Read more
राम खड़ाऊँ कहाँ गयी
हे राम ! जरा तुम ही बताओ तेरी राम खड़ाऊँ कहाँ गयी इस कलि काल की दुनिया में सगे सम्बंधी आज हुये बेमानी । कर रहे छल कपट आपस में नीति धर्म सब विलुप्त हुये भरत ने राज सिंहासन हड़पाकर रहे वे अपनी मनमानी ।कैकेयी खड़ी अट्टहास कर रहीकौशल्या हुई घर से निर्वासित राजा दशरथ … Read more