चलता फिरता राही
मैं तो एक चलता फिरता राही हूँ,कभी इधर चला, कभी उधर चला,जीवन की राहों पर चलते हुए,नई दिशाओं की ओर बढ़ता चला।जीवन की इस यात्रा में,कभी सुख है, कभी गम है,पर मैं तो चलता रहता हूँ,गम के धुएँ हवा में उड़ाता चला ।सपनों की उड़ान में खो जाता हूँ,नई उम्मीदों के साथ बढ़ता चलाचलता रहता … Read more