ऐसा मित्र कहाँ से लाऊँ
कहाँ कहाँ खोजूँ मैं उसको, किसके दरवाज़े पे जाऊँ,जो मेरे चावल खा जाए, ऐसा मित्र कहाँ से लाऊँ। जीवन की कठिन राहों में, दोस्त हज़ारों मिलते हैं,मतलब पूरा होने पर ही,रास्ते अपने बदल लेते हैंहरदम साथ निभाने वाला, साथी ढूँढ कहाँ से लाऊँ?जो मेरे चावल खा जाए,ऐसा मित्र कहाँ से लाऊँ। हार पक्की मालूम थी … Read more