चलता फिरता राही

मैं तो एक चलता फिरता राही हूँ,

कभी इधर चला, कभी उधर चला,

जीवन की राहों पर चलते हुए,

नई दिशाओं की ओर बढ़ता चला।

जीवन की इस यात्रा में,

कभी सुख है, कभी गम है,

पर मैं तो चलता रहता हूँ,

गम के धुएँ हवा में उड़ाता चला ।

सपनों की उड़ान में खो जाता हूँ,

नई उम्मीदों के साथ बढ़ता चला

चलता रहता हूँ, बढ़ता रहता हूँ,

नई दिशाओं की ओर बढ़ता चला ।

जीवन की यात्रा में कभी रुकना नहीं

कभी थकना नहीं आगे बढ़ता चला,

हर पल नया है, हर पल नया होगा,

नए अनुभवों को संजोता चला ।

जीवन की यात्रा में आगे बढ़ते हुए,

नई ऊँचाइयों को छूता चला,

तारों की तरह चमकता हूँ,

जीवन की यात्रा में आगे बढ़ता चला।

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