लगता है उम्र थक गई

लगता है अब उम्र थक गई मन की तृष्णा सुस्त हो गई वैराग्य मय जीवन हो चला सोच ही परिवर्तित हो गईचीजें दिखती थी जो नयी धूमिल चमक अब हो गई नश्वर स्वरूप संसार यह बात समझ में आ गईअस्थि मंजा से बनी काया बेगानी सी लग रही अनुभूति स्पंदित साँसों की एक खटक सी … Read more

हे जग तूने मुझे क्यों बौराया

हे जग ! तूने मुझे क्यों बौराया तेरे यथार्थ को जान लिया हैछल कपट को पहचान लिया है देखने मात्र में तू अति सुन्दर है वस्तुतः तू विषयों का गृह है इन विषयों में मन क्यों बौराया तू तो है केवल इक माया ..जैसे केले में गूदा नहीं होता छीलो कितना छिलका ही निकलता तेरा … Read more

अकेला

अकेला चला था अकेले ही जाना जीवन का कारवाँ है इक फसाना ..भटक हम गये हैं टेढ़े मेढ़े डगर हैं कौन सी डगर पे कदम है बढ़ाना मृगतृष्णा के पीछे भागते हुए राही भूल गये अपना असली ठिकाना ।विषयों में इतने हम जकड़े हुए हैं चिपकें मोम सा मुश्किल है छुड़ाना आया यहाँ था अपनी … Read more

आशा में जिए निराशा में नही

मत हो निराश मेरे बच्चों, जीवन पथ पर तुम्हें चलना है मिलेंगे काँटे जगह जगह, काँटों को साफ तुम्हें करना है कमजोर तुम्हारा वक्त है तुम नही, वक्त भी गुज़र जायेगा खिलेंगे फिर फूल चमन में, नया सवेरा फिर आयेगाहिम्मत ही तेरा संबल है, हिम्मत ही होता आत्मबल है वीर हार से नहीं घबराते हैं, … Read more

नयी सोच गीत

कहाँ गये पुराने गीत सुहाने सोलहवें सावन के वे गानेगुजरी फ़िल्मी ये बातें हैं आया इक नया जमाना है.नयी उपज की नयी सोच है आधुनिक शिक्षा का ये प्रतिफल है जीवन जीना स्वच्छंद रूप से दख़लंदाज़ी नहीं पसंद है तीस के पहले शादी नहीं होती ना नुकुर उस पर भी होती माँ बाप की मर्ज़ी … Read more

जीवन गणित

जीवन “गणित” हैसांसें “घटती” हैअनुभव “जुड़ते” हैअलग अलग “कोष्ठकों” मेंबंद हमबुनते रहते हैं “ समीकरण” लगाते रहते हैं “गुणा”- “भाग”जबकिअंतिम सत्य “शून्य है”

कृतज्ञता

कृतज्ञ हूँ उन सभी छोटी सी छोटी चीजों काजो मेरे जीवन में विशेष ख़ुशियाँ लाती हैं कृतज्ञ हूँ उन सभी साधारण से साधारण आयोजनों का जिसने मेरी ज़िन्दगी में बदलाव ला दिया कृतज्ञ हूँ उन सभी छोटे बड़े लोगों काजिन्होंने मेरे जीवन को असाधारण नयी दिशा दी ..

अधूरी कविता

मेरी वह अधूरी कविता कहाँ तू गयी लिखना चाहता हूँ अगली पंक्ति पिछली छुप गयी । आधी अधूरी पड़ी हुई थी नाराज़ हो गयी मान रहा हूँ अपनी गलती बड़ी भूल हो गयी । शब्द नही थे मेरे पास तू अपूर्ण रह गयी मत कोसना मुझको तू लेखनी मेरी है नयी । जोड़ घटाकर पूरा … Read more

चारित्रिक गुण

डूबो तो इतना डूबो समुद्र तल से मोती चुन लाओ तुम ! उड़ो तो इतना उड़ो नभ की ऊँचाईयां नाप लाओ तुम ॥ मन तो बहुत ही चंचल है कंट्रोल में इसको लाओ तुम ।फिसलने की फ़ितरत इसकी सबक इसे सिखाओ तुम ॥छिछले ज्ञान का मूल्य नही मिथ्या भ्रम मत पालो तुम । ज्ञानी यदि … Read more

जीवन कैसे जिये

गतिविधियों का मत बनो दास कुछ हास करो कुछ परिहास करो जीवन की आपाधापी से समय निकालो कुछ अपने लिए !मत बनाओ जटिल जीवन को सरल सुगम जीवन शैली अपनाओ विश्लेषण जीवन का बंद करोजीवन जिओ परमार्थ के लिए !मत सोचो कभी अपने मन में तू ही इक कर्ता है तू तो है इक निमित्त … Read more