रे मन तू चिंता मत कर

रे मन ! तू चिंता मत कर !!चिंता होती चिता समान तन मन को करती जर्जर बड़े भाग्य से मानव तन मिलता इसे व्यर्थ तू न कर यह जीवन अनमोल बहुत है प्रभु की अद्भुत देन है आंक तू जीवन के मूल्य को हर पल ख़ुशियों में भर ।चिंता मन में जब सताये बैठ जा … Read more

मिट्टी का घड़ा

मिट्टी का घड़ा ✍️किसी ने पूँछा घड़े से तुम इतना शीतल क्यों हो? घड़ा बोला -शीतलता मेरा गहना है कोमलता है मेरा स्वभाव विशुद्ध निर्मल मन है मेरा जीवन केवल परोपकार..पैदा हुआ मैं मिट्टी से अतीत है मेरा मिट्टी का किस बात का अहम् करूं जिस पर मैं इतराऊँ कृतघ्न नही कृतज्ञ हूँ मैं अपने … Read more

सुकून

दर दर भटकते फिर रहे सुकून की तलाश में,सुकून घर में ही बैठा मिला पर न दिखा वह निगाह में ।सुकून कोई वस्तु नही जिसे हम बाजार से ख़रीद लें, सुकून को यदि है ढूँढनाडूबकी लगाये गहरे ध्यान में ।मिल जाता है दो पल कासुकून बंद आँखों की बंदगी में,वरना थोड़ा थोड़ा परेशान तो हर … Read more

ऐ पथिक

तू तो केवल एक राही है चलना ही तेरी नियति है कर्म में ही है अधिकार तेरा ऐ पथिक तुझे चलना होगा । ठहराव नहीं अवसाद नहीं आशा में ही जीना होगा काँटों भरा पथ क्यों न हो इसे तुझे पार करना होगा । संघर्षों से जो घबड़ाते हैं वे तो कायर कहलाते हैंरंग मंच … Read more

कैसे कहूं मैं कवि हूँ

कैसे कहूँ मैं कवि हूँ पूरी वर्णमाला तक तो याद नहीं व्याकरण का पता नहीं अपना लिखा भी भूल जाता हूँ ठोक पीटकर जो गढ़ते हैंउनमें से मैं हूँ नहीं, कैसे कहूँ मैं कवि हूँ ।अन्तर्मन के मेरे शब्द मेरे बच्चों की तरह हैंजो समय पाकर बढ़ते रहते हैं नाराज़ होकर अपना अलग घर बना … Read more

एक कवि की वेदना

सोच रहा हूँ अगर गया तो क्या छोड़ूँगा अपने पीछे कुछ लिखी कवितायें जिसका कोई मोल न होगा इस तंग दिल दुनिया मेंदो एक दोस्त जिस परभरोसा है कुछ बना हुआवह भी कितना साथ निभायेंगे कुछ पता नहीं भागम भाग रहा जीवन हिसाब किताब की बही में ऐसा कुछ भी नहीं जो प्रिये तुम्हारी मुसीबतों … Read more

मैं अब बदलने लगा हूँ

दोस्तों !मैं अब स्वयं को बदलने लगा हूँ अपने में ही अब मैं जीने लगा हूँ नही पालता कोई टेंशन की बातेंअपने में ही मैं मुस्कुराने लगा हूँ ।लेखनी से भी दोस्ती करने लगा हूँमन में जो आये वो लिखने लगा हूँ नही पड़ता बेमतलब के पचड़ों में सेवानिवृत्ति का लुत्फ़ लेने लगा हूँ ।बेबसी … Read more

दिया जलाये

मित्रों एक ऐसा दिया जलायें हृदय स्थल तक प्रकाश करे मन का कलुषित भेद मिटा दे जड़ से इसका विनाश करें ।क्या तेरा है और क्या मेरा है यह सब मन का ही फेरा हैजब तक है प्राण इस तन में साथ बैठकर हम श्वास भरे ।एक दिया इतना सुन्दर हो जैसे होता देवों का … Read more

हाइकू

तू मित्र मेरा मेरा हृदय मीततू कहाँ चला ।तू छोड़ चला इस दुनिया को हीन पता चला । तप्त हृदय अश्रुपूर्ण नयन किससे कहूँ । नश्वर जग कोई न कालजयी जीवन सत्य ।मृत्यु अटलपल का भी न पता अन्तिम सत्य । स्वरचित –

लेखन एक कला है

लेखन एक कला है लिखते तो सभी हैंलिखावट है न एक जैसी इसकी नही नक़ल है ।अभ्यास कर रहा हूँ लेखनी को धार दे रहा हूँ हाय कुंठित है बुद्धि मेरी विचारों की जो कमी है । मैं हूँ कोरा काग़ज़ शब्द नहीं मिल रहे हैंलेखनी है आज कुंठित भावों की जो कमी है ।वह … Read more