यशोधरा की वेदना
प्रियतम ! क्या क़ुसूर था मेरा भोर में चुपके से छोड़ कर निकल चले ।मैं आपकी यशोधरा हूँ आपकी अर्द्धांगिनी हूँ, आपका संबल हूँ मैं, आपके सत्य मार्ग में बाधक नहीं, क्या दोष था आखिर मेरा चुपके से मुझे छोड़ कर निकल चले ।शपथ ली थी पवित्र अग्नि के समक्ष सात जन्मों तक साथ निभाने … Read more