मेरी साइकिल

चल चल मेरी साइकिल

खुर्र खुर्र खुर्र

तू तो रही मेरे बचपन की साथी

तय करती मंजिलें फुर्र फुर्र फुर्र ।

सरपट दौड़ती रहती थी

टेढ़ी मेढ़ी पगडंडियों पर

तेरे भरोसे चल देता था

कोसो मंजिल तय करता था,

न तू थकती थी न मैं थकता था

कैसा सुन्दर ये गठबंधन था ।

पैडल पर पैडल मारता था

फ़र्राटेदार दौड़ती थी

सुबह सुबह मैं उठ जाता

तुझे नहलाया धुलाया करता था

क़रीने से तुझे सजाता था

तू दुल्हन जैसी चमकती थी

तू तो रही मेरे बचपन की साथी

मेरी हमराह, मेरा आत्मविश्वास

चल चल मेरी साइकिल

खुर्र खुर्र खुर्र ॥

तेरी हर पैडल में मेरा सपना था

तेरी हर पहिये में उम्मीद बंधी थी

तू केवल मेरी नहीं साइकिल थी

तू तो मेरी जिगरी दोस्त लगती थी ।

मैं तुझसे बातें करता था

अपनी योजनाओं की चर्चा करता था

दिली तमन्ना तुझे बताता था

तू कहती थी मत घबराना

हर मोड़ पर इक नई चुनौती है,

तुझे तलाश करनी हैं संभावनाएं,

केवल आगे बढ़ते रहना है

हर चुनौतियों का सामना करना है ।

मत छोड़ना साथ मेरा

तुझे तेरी मंजिल पहुँचाऊँगी ।

तुझे नहीं भूला हूँ मेरी साइकिल

तू अब भी मेरे दिल में बसती है

चल चल मेरी साइकिल

फिर फिर फिर

तू है मेरे बचपन की साथी

तय करती मंजिलें फुर्र फुर्र फुर्र ।

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