मेरा सफ़र मेरी दास्ताँ

मेरा सफ़र मेरी दास्ताँसमर्पण“मातृदेवो भव, पितृदेवो भव।”“पितृपादोदकं तीर्थं, मातृवाक्यं हि मन्त्रवत्।”इस जीवन-यात्रा का समस्त गौरव मैं अपने पूज्य पिताश्रीश्री राम नरेश त्रिपाठी जी तथा स्वर्गीय माताश्री रुक्मणी देवी जी के पावन चरणों में समर्पित करता हूँ।आपका पुत्र होना मेरे लिए परम गर्व और सौभाग्य है।प्रभु से मेरी यही प्रार्थना है कि जन्म-जन्मांतर में मैं आपका … Read more

यही मेरी असलियत

यही मेरी असलियत✍️ये नाम,ये पद, ये शोहरत क्या है और क्या करे इसका ? सब शून्य ही तो है, केवल लोक व्यवहार के लिए है। मत उलझो मिथ्या भ्रम में, इसी में चक्कर लगाते रहोगे, कुछ हाथ में नहीं रहेगा । न मैं लेखक हूँ, न मैं गायक हूँ न शिक्षक हूँ न हूँ पत्रकारन … Read more

क्या पता कल रहें या न रहे

हमें हर रिश्ते संजोकर रखना चाहिए क्या पता कल रहें या न रहें ।क्यों बना रखे हो मन में दूरियाँ आओ बैठो कुछ बात करें कुछ तुम कहो कुछ हम कहें क्या पता कल रहें या न रहे याद करें वो बचपन के दिन कैसे साथ हम रहते थे एक दूजे की पकड़ कर उँगली … Read more

मैं कोई कवि नहीं

मैं कोई कवि नही हूँ न मैं कवि कहलाना चाहता हूँ लिखता रहता मन की बातें मन की बात सुनाता हूँ । छंद विधान मुझे न भाये न मैं इसकी राग अलापता हूँ सच्चाई पर मेरी लेखनी चलती भाट राग न सुनाता हूँ ।भूखे पेट बच्चों को देखता उन पर द्रवित मैं हो जाता हूँ … Read more

कैसे न लिखूँ

लोग कहते हैं छंद विधान में आप नहीं बँधते हैं आपकी कविता अधूरी है, मैं कहता हूँ कि क्यों पड़ूँ पचड़े में जो लिखता हूँ कसौटी पर खरा होना ज़रूरी है । शौक़ नहीं है मेरी मैं प्रतिष्ठित कवि बन जाऊँ पर मन की पीड़ा को रचना में मैं उतारता हूँ।लिख देता मन की वेदना … Read more

मिथ्या अहम् लेख

मित्रों!! बहुत दिनों से कोई लेख नहीं लिखा था आज लिखने बैठ गया तो एक नया विषय मन में उभर आया – अहम् की भावना, तो बढ़ते हैं इसी विषय पर । पता नहीं कोई अहम् की भाषा बोलता है मैं ये कर डालूँगा, मैं वो कर डालूँगा, मुझसे पंगा नहीं लेना, तुम्हें बहुत मंहगा … Read more

नवागंतुकों का न तिरस्कार करो

🌿 आड़ा-तिरछा लिखने दो 🌿आड़ा तिरछा लिखने दो,जो लिख रहे हैं उन्हें लिखने दो।प्रयास की ज्योति जलने दो,मन की कलम को चलने दो।।जो मौन रहे, जो चुप बैठे,उनसे ये तो बेहतर हैं।कच्चे शब्दों में भी दे जाते,संदेश नये ये सुंदर हैं।।कभी डाले काटेंगे अपनी,कभी गिरेंगे गिरते फिर उठेंगे।सतत साधना से ही तो,लेखन के दीपक चमकेंगे।।सूर-कबीर … Read more

अंक तेरह की पुकार

तेरह हूँ मैं, प्रश्न मेराक्यों मुझसे जग डरे भला?गणना का मैं हिस्सा हूँ,फिर मुझ पर ये रोष क्यों चला?भारत ने भी मुझे बाँधा,तेरहवीं के कर्मकांड में।शुचिता पर प्रश्न उठाकर,अशुद्ध कहा अनजान में।पश्चिम ने और बदनाम किया,यीशु के अंत से जोड़ा नाम।अंधविश्वास की छाया तले,किया मुझे अपमान तमाम।क्या मैं मृत्यु का वाहक हूँ?या कोई अमंगल दाता … Read more

हाथ की लकीरें

ऐ मानव! ग़ुरूर न करना,जन्म से पहले लिख दी पहचान।तुझसे पहले ही तय हो चुका,तेरे जीवन का कुछ विधान।तू इन रेखाओं का बंधन है,इनके बिना न कोई अस्तित्व।पढ़ सके तो पढ़ ले भाषा ये,तीनों काल का गुप्त संकेत।तेरी जन्मकुंडली यही है,मिटती नहीं ये रहस्यमयी छाप।गहराई तक अंकित पहेली,जिसका न कोई पा सका माप।आत्मा का दर्पण … Read more

कल तक खुश थे

🌿 कल तक खुश थे 🌿कल तक खुश थे,आज कहानी बन गये।वाह रे जिन्दगी!तुझे क्या कहें?कहीं फ्लाइट गिरी, कहीं हेलीकॉप्टर,कहीं गिरे बम के गोले।मानवता चीत्कार कर रही,मृत्यु बुला रही धीरे-धीरे।डीएनए टेस्ट करा दो,श्रद्धांजलि दे दो।दो-चार आंसू बहा लो,संवेदनाएँ व्यक्त कर लो।इंतजार कर रहे घर में बच्चे,इंतजार कर रहे बूढ़े माँ-बाप।वो नौनिहाल, जो नहीं जानते,मृत्यु कैसी … Read more