जब सन्नाटा बोल उठा गीत

गीत : जब सन्नाटा बोल उठाकहाँ गए वे मिलने वाले डोरबेल अब नहीं बजती,घर में कोई न आता, न पुरानी महफ़िल सजती॥. सन्नाटा बोल उठा दिखते घर में एक-दो जन हैं,उनमें भी अब सन्नाटा।सुबह ढले, फिर शाम उतरे,पर मौन नहीं है घटता।जीवन बन गया बोझिल-सा,नीरस पथ यूँ ही कटता।दीवारें भी मौन खड़ी हैं,कोई बात नहीं … Read more

किस ओर जा रही तू जिंदगी

किस ओर जा रही तू ज़िंदगी,हर राह में दिखती तू अजनबी,चेहरों के बीच तन्हाई है,रिश्तों में अब बस औपचारिकता सी॥हर मोड़ पे यादें बिखरीं पड़ीं,कुछ हँसीं, कुछ आँसू जुड़ीं,जो पास थे, अब दूर हुए,बातें रह गईं अधूरी सी।नज़रों में चमक तो है मगर,दिल में वो गर्मी अब नहीं,भीड़ में भी खालीपन है,हर चाहत अब मजबूरी … Read more

मेरी कलम मेरा संबल

मेरी कलम ही मेरी ताकत, मेरा चिंतन ही मेरा संबल।संघर्षों में ढूँढ लिया मैंने, हर चुनौती का सुंदर पल॥कुछ पटल न बुलाते मुझकोजैसे मैंने कुछ छीना हो, पर सत्य की राह पे चलने कामुझको गर्व नसीना हो, झूठ जहाँ मखमल ओढ़े हैमैं सत्य का उजियारा पल॥मेरी कलम ही मेरी ताकत॥डरते वो जो नकल से जीतेमैं … Read more

संघर्ष में ही ख़ुशियाँ ढूँढे गीत

ज़रूरी नहीं जग में सभी सुखी ही होई,लिखा जो ललाट पे, मेट सके न कोई॥विधि की गति विधि ही जाने, जान सका न कोई,सुख है तो दुख भी होता,बचा न जग में कोई॥देव, दनुज, किन्नर सब देखे सब दुखी ही दिखते हैं,ईश्वर भी तो पीड़ित दिखता वन-वन सिया राम भटकते सोई॥मत घबराओ, दुखी न होओ,दुनिया … Read more

छोड़ दो वो स्थान

छोड़ दो वह स्थान,जहाँ मान न हो, जहाँ आँसू बहें । बुलावा नहीं चाहिए वहाँ,जहाँ प्रेम और आत्मिक भाव रहे,मन स्वयं पहुँच जाता है वहाँ,जहाँ प्रेम की गंगा बहे।जहाँ लगाव नहीं, बिलगाव रहे वहाँ ठहरना व्यर्थ हैछोड़ दो वह स्थान,जहाँ मान न हो, जहाँ आँसू बहें । जहाँ अपमान और तिरस्कार हो,वहाँ सम्मान की राह … Read more

कविता वही जो हृदय से निकले गीत

कविता वही जो हृदय से निकले,भावों का सागर बन जाए।कवि की कल्पना जब सजीव हो,शब्दों में जीवन जग जाए॥कविता वही कविता वही॥अश्रु को जो मुस्कान बना दे,दुख में भी दीप जलाए।थके हुए मन को जो छू ले,नई उमंग भर लाए॥कविता वही कविता वही॥न हो छलावा, न हो आडंबर,सत्य का स्वर गूँजे।प्रेम की धारा बहे जहाँ … Read more

मन और मौन

कैसे स्वयं को खुश रखूँन चाहते हुए भी मन कभी-कभी विचलित हो जाता है।कोई न कोई बात, कोई नज़र, कोई घटना मन की शांति को हिला देती है।सूर्य निकलता है, किरणें फैलती हैं,मुस्कुराती हुई कहती हैं “मेरी ओर झाँको, मन का ताजा करो,दिन की शुरुआत ख़ुशियों से करो।”पर कभी-कभी नक्षत्र विपरीत होते हैं,राहु-केतु समय के … Read more

मैं अतिरिक्त हूँ

हाँ, मैं अतिरिक्त हूँ पर मैं भी तो इंसान हूँ,न पुरुष, न नारी सही,पर मेरा भी एक सम्मान है।न मैं पुरुष, न नारी हूँ,समाज से मैं परित्यक्त हूँ।कभी पुरुष बन जाता हूँ,कभी नारीत्व में अनुरक्त हूँ।मैं भी शरीक होता हूँआपकी खुशियों के मेले में,ढूँढता हूँ अपनी जड़ें रोज़आपके ही इस खेल में।पर नहीं जानता कहाँ … Read more

मत डरा मुझे

मत डरा मुझे हे मृत्यु-काल मत डरा मुझे हे मृत्यु-काल ! मैं अजर हूँ, अमर हूँ, निडर बेहाल, तेरा शासन तन तक सीमितमैं आत्मा हूँ असीम विशाल।तू क्या मुझे मिटा सकेगामैं तो सत्य की ज्वाला हूँ, भस्म भले यह देह हो जाए पर मैं हरि का उजियाला हूँ।शक्ति हूँ मैं, शिव का अंश हूँ मुझमें … Read more

सत्य की खोज में सिद्धार्थ से बुद्ध तक

संसार तो एक दृश्य-जगत हैदेखने में अनुपम, आकर्षक, मोहक।यह चंचल मन उसी में उलझा रहता है।पर प्रश्न उठता हैयदि यह संसार इतना मनोहर है,तो राजकुमार सिद्धार्थराजसुख छोड़ वन क्यों चले गए?क्योंकि उन्होंने केवल राजमहल का वैभव देखा था,उसके भीतर छिपे दुखों का सत्य नहीं।यौवन देखा था, पर वृद्धावस्था नहीं;चार कंधों पर उठी अर्थी देखी,तो जीवन … Read more