चल कर्म की राह चल

चल कर्म की राह चल, हार से मत डर ऐ मन,

जो जैसा बोए बीते पल, वैसा ही पाता जीवन ॥×2

इस दुनिया रूपी सरिता में बहना ही पड़ता,

दुख हो चाहे सुख हो जीना ही पड़ता।

भाग्य तभी बनता संबल, जब श्रम बरसे सावन,

जो जैसा बोए बीते पल, वैसा ही पाता जीवन ॥

नियति लिखी सही मगर, बदलती हिम्मत से,

उठती जो आँखों में लौ जलती हौंसले से।

कल भी हम थे, आज भी हम हैं, कल भी होंगे

चल कर्म की राह चल, हार से मत डर ऐ मन ॥

माना कि पथ कठिन सही, काँटों से भरपूर,

मंज़िल भी वहीं मिले, न थक जाए तन-चूर।

प्रभु की कृपा मिले जब धूल बने चंदन मन,

जो जैसा बोए बीते पल, वैसा ही पाता जीवन ॥

छोड़ो बीते क्षण सोचो अब आगे,

जलाओ दीप अन्तर्मन, बढ़ो निर्भय आगे।

वक़्त बहुत अनमोल है, जी लो पल चुन-चुन

चल कर्म की राह चल, हार से मत डर ऐ मन ॥

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