चूड़ामणि गीत रूप

सागर में हलचल जगी, निकले रत्न हजार

वहीं जन्मी चूड़ामणि, न्यारी थी उपहार ॥ ×2

नन्दिनी हुई मोहित हरि पर, बढ़ा प्रेम अपार,

सागर ने अर्पण में दी थी, मणि अमर उपहार।

इन्द्र देख रह न पाए, चितवन में अनुराग

हरि ने देकर इन्द्राणी को, किया अतिथि सत्कार ॥

🔸 दोहराव: सागर में हलचल जगी

शम्बर रण में संकट छाया, डोला देव समाज,

दशरथ संग कैकेयी पहुँचे, लेकर वीर स्वराज।

असुर हुआ परास्त वहाँ पर, बजा जय-जयकार

चूड़ा मणि तब कैकेयी को, दी इन्द्राणी प्यार ॥

🔸 दोहराव: सागर में हलचल जगी

अयोध्या लौट मिली सुमित्रा, बहनों में अनुराग,

चूड़ामणि सुमित्रा को दीन्हा, बढ़ा प्रेम का ताग

राम–सीता विवाह शुभ दिन, मंगल पड़ी पुकार

दिव्य मणि सुमित्रा ने दे दी, भेंट स्वरूप उपहार ॥

🔸 दोहराव: सागर में हलचल जगी

अशोक वाटिका सीता बैठी, दुख की व्यथा बेहाल,

हनुमान श्री चरणों में झुके थे, बन कर दूत निहाल।

मुद्रिका पाकर बोली माता “चिह्न दूँ पहचान”

“राम मिलेंगे चूड़ा से ही, जले रावण अभिमान” ॥

🔸 दोहराव: सागर में हलचल जागी

हनुमान उड़े लिए चूड़ा, आँसू भर कर याद,

कंपित थे रघुनंदन के नयना, मणि देखा जबसाद।

प्रण किया “अब ठहर न पाए, रावण का अभिमान”

“लौटी माता होगी मणि संग, होगा सत्य प्रधान” ॥

सागर में हलचल जागी, निकले रत्न हजार

वहीं जन्मी चूड़ामणि, न्यारी थी उपहार ॥

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