कहाँ गये वो गांव

भ्रमण पर निकला था

गाँव के इस छोर से उस छोर

देखकर भौचक रहा

कुछ भी तो न दिखा

कहाँ गये वे छप्पर सारे,

कहाँ गये कच्चे, वातानुकूलित

सब घर मेरे प्यारे,

कहाँ गयी दोस्तों की

वह शाम की महफ़िल

गपशप और हंसी ठिठोली,

कहाँ गयी दादा दादी की बैठक,

कहां गया सब स्वजनों का प्यार,

सब कुछ बदल गयो रे यार॥

कहां गये सब पंडित ज्ञानी,

कहाँ गये आचार्य,

कहाँ गये सब गीत गवैया

कहाँ गयी द्वारे की शान,

कहाँ गये मेरे पुराने अड्डे ,

कहा गये सब यार,

कहाँ गये वे नीम के झूले,

कहाँ गये बहनो के पंगे,

कहाँ गयी सब गुल्ली डंडा ,

कहाँ गयी वह शान,

सब कुछ बदल गयो रे यार ॥

कहाँ गयी वो ताल तलैया,

कहाँ गयी काग़ज़ की नैया,

कहाँ गये मिट्टी के खिलौने,

कहाँ गये सब प्यारे घरौंदे,

कहाँ गयी नदिया की नैया,

कहाँ गये काका मल्लाह

कहाँ गये वो नाऊ काका,

कहाँ गये वे मोची दादा,

कहाँ गये सब घर के नौकर

कहां गयी सब राम जोहार,

सब कुछ बदल गयो रे यार ॥

कहाँ गये गाँवों के गीत सुहाने,

कहाँ गयी आल्हा ऊँदल की ललकार,

कहाँ गये वे मुंशी सारे,

कहाँ गयी सुटकन की मार,

कहाँ गयी सब चौखट यारी,

कहाँ गयी पुरखों की मरजाद,

कहाँ गयी सब भाई चारा,

कहाँ गयी आपस में प्यार,

कहाँ गयी सब बैलों की जोडी

कहाँ गये खेत खलिहान,

सब कुछ बदल गये रे यार ॥





Leave a Comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.