प्रेम गीत

जो प्रेम किसी को पीड़ा दे, वह प्रेम नहीं होता ।

सुख दुख में जो न साथ निभाए, वह प्रेम नहीं होता ॥

प्रेम एक अनमोल भावना है,

प्रेम जीवन जीने का अर्थ होता

सुख दुख में जो न साथ निभाए,

वह प्रेम नहीं होता, एक ख्वाब नहीं होता।

प्रेम तो है दिल से अनंत समर्पण,

प्रेम एक विश्वास होता

प्रेम में सौदा नहीं होता

दिल का प्रेम प्रेम होता ।

प्रेम हो तो शीरी फ़रहाद की तरह,

हीर रांझा की तरह, जुनून से भरा,

सब कुछ लुटा दो प्रेम पर,

वह प्रेम अमर होता ।

प्रेम में राधा बन जाओ,

कृष्ण कृष्ण ही जपा करो, एक प्रेम गीत।

प्रेम में मीरा बन जाओ,

कृष्ण कृष्ण ही जपा करो, दिव्य प्रेम होता ।

प्रेम हो तो चैतन्य जैसा,

तन बदन की सुध बुध न रहे,

प्रेम में जो मोल भाव करता,

वह प्रेम नहीं होता, वह एक सौदा होता ॥

कवि

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