देता हूँ एक मशविरा, सुन लो कान लगाय ।
पत्नी यदि नाराज़ है, पंगा मत लो भाय ॥
गृह कलह मत बढ़ाइये, मन में रहे सुकून ।
शांति से जीवन कटे, पा रोटी दो जून ॥
कुछ समय भी निकालिए, बैठिये पत्नी पास ।
इधर उधर मत नाचिए, पत्नी मन हो हुलास ॥
हाथ बंटा लो किचन में, यदा कदा तुम जाय ।
मूल मंत्र यह है बड़ा, ध्यान में रखो भाय ॥
पत्नी सुख की सार है, मान लीजिए बात ।
उससे ही संसार है , बाक़ी केवल नात ॥
पति पत्नी हो साथ में, लिये हाथ में हाथ ।
जीवन नैया पार हो, कर प्रेम निःस्वार्थ ॥