पत्नी का साथ दोहे

देता हूँ एक मशविरा, सुन लो कान लगाय ।

पत्नी यदि नाराज़ है, पंगा मत लो भाय ॥

गृह कलह मत बढ़ाइये, मन में रहे सुकून ।

शांति से जीवन कटे, पा रोटी दो जून ॥

कुछ समय भी निकालिए, बैठिये पत्नी पास ।

इधर उधर मत नाचिए, पत्नी मन हो हुलास ॥

हाथ बंटा लो किचन में, यदा कदा तुम जाय ।

मूल मंत्र यह है बड़ा, ध्यान में रखो भाय ॥

पत्नी सुख की सार है, मान लीजिए बात ।

उससे ही संसार है , बाक़ी केवल नात ॥

पति पत्नी हो साथ में, लिये हाथ में हाथ ।

जीवन नैया पार हो, कर प्रेम निःस्वार्थ ॥

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