हे माँ, तेरी ममता कहाँ गई
मुझे प्यार क्यों नहीं करती
कितनी पत्थर दिल की हो
मेरी पीड़ा को नहीं समझती
हे माँ, तेरी ममता कहाँ गई
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मैं तेरा बच्चा हूँ, तेरा खून हूँ
तेरी कोख से जन्मा हूँ
फिर क्यों मुझे तपाती हो धूप में
बिन कारण पीटती हो
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मैं तेरा अरमान हूँ, तेरा सपना हूँ
तेरी खुशी का सबब हूँ
क्यों मुझे दर-दर भटकाती हो
मुझसे भीख मँगवाती हो
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मेरी आँखों में आँसू हैं
मेरे दिल में दर्द है
मेरे भी अरमान हैं
मुझे भी पढ़ना है, स्कूल जाना है
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देखता रहता दूसरे बच्चों को
खूब पढ़ूँगा, अच्छा बेटा बनूँगा
आपका नाम रोशन करूँगा
दे दो शिक्षा की भीख मेरी झोली में
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भिक्षा यापन जो करती हो
यह अच्छा कर्म नहीं होता
मेहनत की कमाई ही बेहतर है
भिक्षा की रोटी मंज़ूर नहीं
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हे माँ, तेरी ममता कहाँ गई
मुझे प्यार क्यों नहीं करती
कितनी पत्थर दिल की हो
मेरी पीड़ा को नहीं समझती