सच से करता प्रश्न हूँ, बैठे क्यों हो मौन।
हंसकर बोला प्रेम से, सुनता सच है कौन ॥
सरल स्वभाव है भला, होता ये संस्कार ।
निर्बल उसे न समझिये, जिसका हृदय उदार ॥
झुकना अच्छी बात है, देती इक पहचान।
स्वाभिमान के मोल पर, होत नही सम्मान।।
मिट जाती हैं दूरियां, रख वाणी पर मौन ।
विनम्रता का भाव हो, ज्ञान सिखाये कौन ॥
अनुभव का स्वागत करें, अनुभव देती सीख ।
कौन बदल दे ज़िन्दगी, ग्राह्य ले यह सीख ॥
मन अरु दामन साफ़ हो, मन से मिलता मान ।
हृदय में सरल भाव हो, मिलता है सम्मान ॥
मुस्कुराते रहो सदा, न रहो कभी उदास ।
जैसी भी है ज़िन्दगी, प्रभु पर हो विश्वास ॥
कुछ समय निकालिए, कर लो तुम उपकार ।
जन्म यह सार्थक बने,जगत तो मिथ्याचार ॥
दुनिया इक रंगमंच है, निभा रहे किरदार ।
बारी बारी आ रहे , जाते हैं क्रम वार ॥
शान शौक़त न देखिये, आँखों का भ्रमजाल ।
क्षण भंगुर है जिन्दगी, सब कुछ माया जाल ॥
घनिष्ठ मित्र है वही, दुख में आये काम ।
शुद्ध मन से गले मिले, न की निकाले खाम॥
मिलता बहुत सुकून है, करके परोपकार ।
सब धर्मों से है बड़ा, सेवा का संसार ॥
मजबूरी इंसान की, करवाती है पाप ।
स्थिति को मत भुनाइये, कर्म करे निष्पाप ॥
समय होत बलवान है, रहता सदा न साथ ।
चूर करे अभिमान को, पीछे पीटे माथ ॥
क्रोध कभी मत कीजिये, होय पाप का मूल ।
जड़ विनाश का है यही, करता नष्ट समूल ॥
हाय कभी मत लीजिये, करिये मत अपमान ।
सुन गरीब की हाय को, दंड देत भगवान ॥
अक्षुण्य रहती है सदा, आत्मा और ज्ञान ।
मृत्यु अन्तिम सत्य है, मन में ले यह जान ॥
मरते लाखों लोग हैं, रखते अनन्त चाह ।
आश्चर्य तो है यही, सबकी ख़ाली राह ॥
ज़िन्दगी को न परखिए, अद्भुत इसका खेल ।
उल्टा पुल्टा कब करे, चाहे चढ़ें न बेल ॥
ख़ूबसूरत ए ज़िन्दगी, मानव को उपहार ।
हँसी ख़ुशी इसे जिये, ख़ुशियों का अंबार॥
परिश्रम और लगन ही, निर्मित करे भाग्य ।
कर्म बिना कुछ भी नही, फल निष्फल हो जाय ॥
लोभ कभी मत कीजिये, लक्ष्मी हो नाराज ।
धन संग्रह का ढेर भी ,समय न आये काज ॥
अतिथि क्यों आते नही, दूर दूर सब भाग ।
समय की है व्यस्तता, या कम है अनुराग ॥
दिल में बसे रिश्ते वही, जो मन को भा जाय ।
उतर जाये जो मन से , उनसे करें दुराय ॥