जीवन में नम्रता रखो भजन

जीवन में नम्रता रखो, विनय से दीप जलाओ,

अहंकार छोड़ दो मन का, राधे नाम बसाओ॥

धन-सम्पत्ति पल में घटती, रोग रूप को खा जाए,

मान-सम्मान चुक जाता है, भूल ज़रा भर हो जाए।

इस नश्वर दुनिया में कुछ भी, टिकता हैं नहीं यहाँ

रहती सिर्फ दया-करुणा, बाकी परछाई हो जाए ॥

चेहरे की हर रेखा में ही, अनुभव छिपा सुहाना,

नादानी से सीख मिली तो, बढ़ता गया खज़ाना।

ठंड और घमंड मनुज को, अकड़-अकड़ कर डिगाते,

इन दोनों से बचकर चलना, पग-पग सुख मिल जाते॥

खुश रहना हो तो देखो, जो कुछ तुम्हारे पास है,

दूसरों से ईर्ष्या रखकर, जीवन क्यों बना उदास है

जो सच्चे दिल से चिंता करता, उसको मत तुम तोड़ो,

कीमती हीरे को खोकर, पत्थर क्यों तुम जोड़ो॥

हीरा ही तो गौरव देता, मंगल फल लाता है,

सुख-समृद्धि की छाया बनकर, घर-आँगन छाता है

राधा-कृष्ण की कृपा से ही, जीवन पथ सँवरेगा,

नाम भजोगे बांके बिहारी, दुख धीरे-से उतरेगा॥

जीवन में नम्रता रखो, विनय से दीप जलाओ

अहंकार छोड़ दो मन का, राधे नाम बसाओ॥ ×2

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