देख रहा हूँ तेरी आँखों में, पाता हूँ कितना दर्द भरा ।
नहीं समझ पा रहा हूँ माँ, सागर जैसा क्यों अश्रु भरा ॥
बोझिल हैं तेरी आँखें जैसे कहती हैं तेरे दिल की व्यथा
आँखें देखती ही नहीं बोलती भी बयां करती सब व्यथा
मत रोना तुम मेरी माँ, बिछुड़न तो संसार की नियति है
जीवन तो यह नश्वर है , अन्तिम सत्य क्यों दुख से भरा ।
भला कौन चाहता हैं बिछुरन, अपनों को त्याग कर जाये
पर अपनी वश कहाँ चलती है, यमदूत खींच कर ले जाये
तेरी आँखें ये कहती हैं आ मेरे लाल गले तुम लग जाओ
चूम लूँ, प्यार कर लूँ तुम्हें अन्तिम बार, मृत्यु से क्यों डरा ।
कौन रहा इस धरती पर, किसने धरती को भोगा है
सभी काल के ग्रास हुए, सब की यही गति हुई है माँ
जाओ जाओ ख़ुशी से आज, नये जीवन में प्रवेश करो
आशीर्वाद आपका बना रहे, परिवार आपका रहे हरा भरा ।
देख रहा हूँ तेरी आँखों में, पाता हूँ कितना दर्द भरा ।
नहीं समझ पा रहा हूँ माँ, सागर जैसा क्यों अश्रु भरा ॥