अब मैंने जीना सीख लिया है
हर पल को जीना सीख लिया है ॥
जो बंदा कल तक जीवित था
वह आज नहीं है,
सच्चाई यही है जीवन का
अगले पल का कुछ पता नहीं है
जब जीवन ही अनिश्चित है
कल के लिए मैं क्यों सोचूँ ?
आज में जी लूँ, जी भर कर क्यों न जी लूँ
अब मैंने जीना सीख लिया है
हर पल को जीना सीख लिया है ।
क्यों पालूँ व्यर्थ की बातें मन में
जो मुझको उलझाती हैं ,
क्या मुझको कोई कुछ दे जायेगा
मेरा बीता पल वापस दोगे ?
क्यों उलझूँ व्यर्थ की बातों में
तेरी बातें दोस्त तुझे मुबारक !!
नहीं उलझता इधर उधर
अपने में जीना सीख लिया है
अब मैंने जीना सीख लिया है
हर पल को जीना सीख लिया है !
मैंने अपने मन को समझाया है
तू व्यर्थ में मुझे न घुमाया कर
तुझे घूमना है इधर उधर
तू मुझे छोड़कर जाया कर
मुझे अपना जीवन जीने दे
अपनी मर्ज़ी का करने दे
तू मुझे नहीं उलझा पायेगा
मैं अपना जीवन जिऊँगा
अब मैंने जीना सीख लिया है
हर पल को जीना सीख लिया है !