विदाई गीत

हे बोथल के दोस्त मेरे,

चलने की घड़ी अब आई

अब चल चल रे मेरे भाई

बहुत कर ली यहाँ पहुनाई ।

आप सबसे दिल से हुई खूब मिताई,

मिलकर कर ली बहुत घुमाई

ख़ूब जश्न किया, ख़ूब मस्ती हुई,

ख़ूब खिंचाई हुई, ख़ूब हुई धुलाई !

अब चल चल रे मेरे भाई

बहुत कर ली यहाँ पहुनाई।

ख़ूब गाने हुये, ख़ूब बजाने हुये,

मौज-मस्ती के जमकर फसाने हुये

ख़ूब चुटकुले हुये, खूब ठहाके लगे

तालियों की जमकर नज़ारे हुये !

अब चल चल रे मेरे भाई

बहुत कर ली यहाँ पहुनाई।

मेरी कविताओं की भी

तहेदिल से हुई सुनाई,

शुक्रिया करता हूँ ऐ दोस्त

ख़ूब हुई हौसला अफजाई !

अब चल चल रे मेरे भाई

बहुत कर ली यहाँ पहुनाई।

ख़ूब पोटलक हुये, स्वादिष्ट व्यंजन छके,

ख़ूब यात्रायें हुई, ख़ूब पैदल चले,

ख़ूब मन्दिर गये, गुरुद्वारे गये,

बोथल ग्रुप की, जमकर तराने हुये !

अब चल चल रे मेरे भाई

बहुत कर ली यहाँ पहुनाई।

जहां भी गये, गर्व की बात है,

नाम रोशन किया, ग्रुप का डंका बजा,

दिल पुकारे यही, लोग आते रहे, लोग जाते रहे,

बोथल परिवार का कांरवा सतत चलता रहे !

अब चल चल रे मेरे भाई

बहुत कर ली यहाँ पहुनाई।

स्वरचित

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