बेटे के नाम


बेटा विजय, मैं तेरे बारे में

क्या बोलूं और क्या न बोलूँ

बोलूँ तो कितना बोलूँ

और कितना न बोलूँ !

यादो की श्रृंखला बहु लम्बी है

बात बहुत कुछ कहनी है !

जब नाम ही है तेरा ‘विजय’

तो सारे लक्ष्यो पर भी

होगी तेरी निश्चित विजय,

ईर्ष्या नहीं, अभिमान नहीं,

छल कपट, झूठ फ़रेब का भान नहीं,

जीवन में कुछ भी अप्राप्य नहीं

तेरा हंसमुख स्वभाव अरु निश्छल मन,

करुणा का भाव अरु परोपकारी तन,

देता व्यक्तित्व को आकर्षण,

हर लक्ष्य को भेदा है तुमने

जो कुछ भी मन में ठाना है ,

तेरा भविष्य अति उज्ज्वल है

सब पुरखो के सद्कर्मो का प्रतिफल है !

यादो की श्रृंखला बहु लम्बी है

बात बहुत कुछ कहनी है !

तेरे बचपन की कुछ यादें हैं

जो तुझसे साझा करता हूँ

बचपन में तू नटखट था

चुलबुल स्वभाव और चंचल मन,

पर स्वास्थ्य से पीड़ित रहता था

वेदना बहुत तू सहता था,

कुछ मुझ नव दम्पत्ति की अज्ञानता

का भी वह प्रतिफल था,

गृहस्थ जीवन के अनुभव में

मैं जो अधकच्चा था ,

हकीम,डाक्टर, बाबा कुटिया

जो कोई लोग बताते थे

सरपट करता सबके दर्शन

पैरों पर मैं पड़ जाता था

हो जाये शीघ्र स्वस्थ मेरा बेटा

यही कामना करते थे

मन्दिर मन्दिर मन्नत करते थे

हर घाट का पानी पीते थे

रात रात हम जगते थे

चुपके चुपके रोते थे,

क्यूं न करते, दौड़ कर करते ,

तू तो मेरे दिल का धड़कन था,

मेरे जिगर का टुकड़ा था,

नन्हा सा प्यारा मुन्ना था

‘लखून जाना है लखून जाना है’

तोतलि वाणी बोलता था

कितना अच्छा लगता था

कितना चंचल बच्चा था

हम दौड़कर गोद उठाते थे

सीने से चिपकाते थे

प्यार बहुत हम करते थे !

यादो की श्रृंखला बहु लम्बी है

बात बहुत कुछ कहनी है !

आशा ही जीवन का संबल है

दुख आता है तो जाता भी है

पराभव है तो विजय है

जीवन के संग्राम में

मेरा ‘विजय’ विजयी हुआ

नव बेला हुई, हट गया तिमिर,

फैला प्रकाश,

प्रभु ने सुनी हृदय की आवाज़

सब बाधाये कुछ दिन में दूर हुई ,

सब मन्नत मेरी सुफल हुई

घर भर में हर्षोल्लास हुआ

नव जीवन नया प्रकाश हुआ

जो बीत गया सो बीत गया

यह मैंने पहले तुझे नहीं बताया था

पर हृदय वेदना तुझे बतायी

जब अन्तर्आत्मा ने आज आवाज़ लगायी !

यादो की श्रृंखला बहु लम्बी है

बात बहुत कुछ कहनी है !

कुछ अंतराल में क्रम से

आशू मोना का भी आगाज हुआ

परिवार हमारा भरपूर हुआ, ख़ुश हाल हुआ,

तुम सब हंसते खेलते रहते थे

आपस में लड़ते झगड़ते रहते थे ,

धूम धड़ाका करते थे

पटकी का पटका करते थे

मस्ती भर भर कर करते थे ,

गल्ती पर मम्मी पापा से ठुकते थे,

बचपन ऐसा ही होता है

यादो का पिटारा होता है

कोई भूल नहीं सकता अपना बचपन

यह इतना प्यारा जो होता है ।

यादो की श्रृंखला बहु लम्बी है

बात बहुत कुछ कहनी है ।

चुपके से खिसकता था घर से

क्रिकेट था तेरा पक्का जुनून,

कुछ भी नहीं तू सुनता था

अपनी मनमानी करता था

बाल दीवाल में हिट करता था

बाउंस पर खुद ही बैटिंग करता था

हर माह बाप की दिली चाहत है

पढकर बच्चे पहुँचे अच्छे पद पर,

जब पढ़ने में आनाकानी करता था

मेरे कोप का भाजन बनता था,

अनुशासन का तो मैं क़ायल था

पर तू कुछ भी नहीं बोलता था

मौनी बाबा बन जाता था

फिर मनमानी करता था

नहीं पकड में आता था

बल्ला वही पकड़ता था ।

यादो की श्रृंखला बहु लम्बी है

बात बहुत कुछ कहनी है ।

मोना तो पढ़ने में अव्वल थी

आशू भी उत्तम दर्जे की थी

पर तू ऊपर ऊपर पढ़ता था

मतलब भर का पढ़ता था

परीक्षा कापी लखनऊ में

जाकर तेरी जँचती थी

पापा को बहलाने की

सारी थ्योरी अपनाता था

यह तो तेरा बालपन था

नही दोष तेरा कुछ था

आज मुझे क्यों लगता है

हर बच्चे तो ऐसा करते है

शोनू भी तेरे जैसा ही करती है

घर भर को नचाये रखती है

इसी लिये अब मैं चुप रहता हूँ

तेरी हरकतें जो याद करता हूँ

तुझ पर मेरा अंकुश नाजायज़ था

तू तो मेरा छोटा प्यारा अर्जुन था ।

यादो की श्रृंखला बहु लम्बी है

बात बहुत कुछ कहनी है ।

चलना ही था तुझे सतत

विजय पथ पर ,

लम्बे पथ का जो तू राही था

जब ज़िम्मेदारी का भान हुआ

मम्मी पापा के सपनों का अहसास हुआ

तब तेरी छिपी प्रखर बुद्धि रंग लाई

आई एम टी में टाप पोज़ीशन आई

फिर बढ़ता ही रहा प्रगति पथ पर

मुड़कर नहीं देखा तुमने

सब लक्ष्यों को तूने प्राप्त किया

लहरा दिया परचम अपना

अमेरिका तक की धरती पर

तू तो कुल का गौरव है

तू मेरा अमूल्य धन है ।

यादो की श्रृंखला बहु लम्बी है

बात बहुत कुछ कहनी है !

तुझे चोट कभी जब लगती थी

मां बाप को नही बताता था

कितनी चिंता तू करता था

सारी पीड़ा खुद पी जाता था

तू कितना प्यारा बच्चा था

तू तो मेरा अनमोल रत्न है

तू ही मेरे जीवन का धन है

गर्वित तेरा पापा है

तुझ जैसा बेटा पाकर

तू रहे सदा ‘विजयी’ बन कर

उज्ज्वल हो तेरा जीवन

कहते है नियति सब कुछ

पहले ही लिख देती है,

नाहक हम चिंतित होते हैं

पूर्ण समर्पण हो प्रभु पर !

यादो की श्रृंखला बहु लम्बी है

बात बहुत कुछ कहनी है !

सब कुछ तो हमने पाया है

ख़ुशियों का है अम्बार मिला

बोलूँ तो इतना ही बोलूँ

कि अब कुछ चाह

नहीं है इस जीवन में

सब सुखी रहे, आनन्दित हो

किसी बात का न गम हो

अब विराम यही मैं देता हूँ

तेरी तो अकथ कहानी है

मेरे बेटे ‘ विजय’ की

महिमा बहुत निराली है ।।

यादो की श्रृंखला बहु लम्बी है

बात बहुत कुछ कहनी है !

पापा

Leave a Comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.