मनसा आरती भजन

रे मन ! क्यूँ न कर तू मनसा आरती भाग रहा है इधर उधर ।जड़ चेतन सब हरि रूप हैं सर्व व्यापी अरु नित्य स्वरूप, राग द्वेष हैं दुख के कारक रे मन ! इनको वश में तू कर, कर ईश से मनसा प्रार्थना मन की श्रद्धा से तू धूप*कर ।धूप के बाद, दीप* दिखा … Read more

शिव और शबरी का मिलन

बोले शिवजी माता शबरी से“हे माते! खिला दे मुझे वे बेर,जो प्रभु राम को तूने खिलाये थे।दे दे यह भिक्षा मुझे, भिक्षुक रूप में,तेरे द्वार पर आज मैं आया हूँ।”तेरे प्रेम ने शिव को झुका दिया,तेरे त्याग और समर्पण नेभक्ति का नया मार्ग दिखा दिया।ये भोलेनाथ भी आ पहुँचे तेरी कुटिया,हे माते! दे दे वे … Read more

कवि की वेदना

क्या छोड़ूँगा पीछे, क्या छोड़ूँगा पीछेसिर्फ़ शब्द मेरे साथी हैं,लेखनी मेरी पूंजी है,यही मेरी दुनिया है, यही मेरा विश्वास है।सोच रहा हूँ, अगर गया,तो क्या छोड़ूँगा अपने पीछे?खाली कमरे, सुनती दीवारें,और मेरे शब्द जो जीते रहे।भागम-भाग रहा है ये जीवन,संघर्षों से ही रहा नाता है।ठोकर खाकर समझा मैंने,अकेलापन भी साथी बन जाता है।अपने पास कुछ … Read more

सूखी डाली का हरियाली से संवाद

एक डाल पड़ी थी, सूखी सी,बोली हरियाली से “बहना! मुझे अपने पास बैठने देना,मेरा तिरस्कार मत करना।”“तुम जैसी थी मैं हरी भरी,खूब प्रफुल्लित रहती थी।तूफान का एक झोंका आया,मुझे तोड़ कर चला गया।”“लोग तुझे ताकते रहते हैं,मेरी तरफ मुँह नहीं फेरते हैं।तू तो हो मेरी प्यारी बहना,मुझसे तुम अलग मत होना।”बोली हरियाली “सुनो प्रिय बहन,तुम … Read more

साहित्य और सम्मान एक लेख

*** मित्रों इस लेख में मेरे अपने व्यक्तिगत विचार है, जरूरी नहीं कि सभी एक जैसे हैं, कोई अपने ऊपर न ले, अन्यथा न ले, मेरा केवल यहां सच्चाई लिखने का प्रयास भर है ॥मित्रों!! लेखन एक कला है,, माँ शारदे का वरदान है,, सभी को ये कला नहीं आती, मन के भावों की ये … Read more

भिक्षुक एक सत्य मार्ग

“भिक्षुक”नाम सुनते ही अटपटा लगता है,दिखने में साधारण, पर अर्थ गूढ़।जिसने इस शब्द को भलीभाँति समझ लिया,उसने परमात्म तत्त्व को जान लिया।इस मिथ्या संसार मेंहम सभी भिक्षुक ही तो हैं।बिना भिक्षुक बने कोई ज्ञानी नहीं होता,ज्ञानी हुए बिना कोई संन्यासी नहीं होता,और बिना वैराग्य केआत्मबोध कहाँ होता है?यह संसार क्या है?ख़ाली पानी के बबूले,आकाश में … Read more

दहेज की भेंट

*दहेज़ की भेंट ✍️पहला दृश्य . नदिया तट पर पड़ी हुई वह सोचा कवि माजरा क्या है, बोला कवि हे परम सुंदरी !आपका परिचय क्या है ?कौन हो तुम हे सुकुमारी !इस दुर्दशा को प्राप्त हुई हो, नदिया की इस जलधारा में दूर देश से बहकर आयी हो । किस घर की तुम बेटी हो … Read more

अहम प्रश्न मैं कौन हूँ

एक प्रश्न हाँ, एक अहम प्रश्न!मैं कौन हूँ?सीधा उत्तर यहीमैं फलाना, अमुक नाम, अमुक गोत्र,या फिर बस एक मानव, एक देहधारी।पर यह तो सबको दिखता है,सब जानते हैं।तो फिर परम सत्य क्या है?क्या हम उसे जानना नहीं चाहते,या जानबूझकर झुठला रहे हैं?आत्मा क्या है?परमात्मा से इसका क्या जुड़ाव?क्या आत्मा परमात्मा का ही अंश नहीं?यदि है, … Read more

जय जयतु हे श्रमिक

जय जयतु !! हे श्रमिक !! आपके श्रम से ही हमारा भाग्य है ॥ घास फूस की झोपड़ी रिश्ता है संगमरमर से तराशते हैं पत्थरों को आप अपनी उँगलियों सेगढ़ते जा रहे सुन्दर भवन रेत की नव लेखनी से गगनचुंबी इमारतें खड़ी आपके ही कौशल से ॥जय जयतु !! हे श्रमिक ! आपके श्रम से … Read more

पत्नी के जन्म दिन पर

सोच रहा हूँ, सुनो प्रियेसोच रहा हूँ, सुनो प्रिये!कुछ बात कह दूँ,दिल की आज जो मेरे मन भाये।हर राह पर, हर मोड़ पर,जीवन के हर छोर पर,प्रिये! मैंने खड़ा पाया तुम्हें तुम ही मुझे नज़र आये।पाया तुम-सा हमसफ़र सरल हुई जीवन डगर,उड़ रहा हूँ मानो पंख धर,जब साथ तुम्हारा पाये।फूलों-सी मुस्कान लियेहृदय में रच-बस गयी … Read more