मनसा आरती भजन
रे मन ! क्यूँ न कर तू मनसा आरती भाग रहा है इधर उधर ।जड़ चेतन सब हरि रूप हैं सर्व व्यापी अरु नित्य स्वरूप, राग द्वेष हैं दुख के कारक रे मन ! इनको वश में तू कर, कर ईश से मनसा प्रार्थना मन की श्रद्धा से तू धूप*कर ।धूप के बाद, दीप* दिखा … Read more