ऐसा मित्र कहाँ से लाऊँ

ऐसा मित्र कहाँ से लाऊँ ✍️

ऐसा मित्र कहाँ से लाऊँ

ऐसा मित्र कहाँ से लाऊँजो मेरा चावल खा जाए

पाँव पखारे आँसुओं सेबिन माँगे सबकुछ दे जाए

ऐसा सखा कहाँ से पाऊँ

ऐसा मित्र कहाँ से लाऊँ॥

पाँव के छाले देख-देख कर, अपने आँसू से पग धोता हो,

कृष्ण-सा मुझ पर स्नेह लुटाए, मन की बात समझता हो।

कृष्ण-सुदामा जैसी मैत्रीकहाँ भला अब दिखती है?

कृष्ण तो आज भी साथ हमारे सुदामा-सी निर्मलता कहाँ मिलती है?

कहाँ-कहाँ खोजूँ उसको मैं, किसके द्वार पुकार लगाऊँ?

कौन मिलेगा ऐसा सखापोटली खोल चावल खा जाए?

जीवन की कठिन राहों मेंमित्र हज़ारों मिल जाते हैं,

मतलब पूरा होते ही सबराह नई फिर पकड़ जाते हैं।

सभी आज स्वार्थ के भूखेकिससे मन की बात बताऊँ?

हरदम साथ निभाने वालासच्चा साथी कहाँ से लाऊँ?

हर विपदा में खड़ा जो रहेमित्रधर्म वही निभाए,

जिनसे मन के तार मिलेंउनको कहाँ से ढूँढ मैं लाऊँ?

ऐसा सखा कहाँ से पाऊँऐसा मित्र कहाँ से लाऊँ॥

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