पुरानी यादें है यादो का क्या भाग एक

पुरानी यादें है यादो का क्या ...

स्कूल की बात हम करते हैं

अपने अनुभव साझा करते है

कपड़ों का बस्ता सिलता था

नववर्ष में नया बस्ता सजता था

किताबें तरतीब से हम लगाते थे

रद्दी पेपर या ख़ाकी पेपर की

जिल्द हम चढ़ाते थे

भरपूर महारथ हासिल थी

ऐसे कामों के जो हम बाज़ीगर थे

पुरानी किताबो से हम पढ़ते थे

अदवलाबदली करते रहते थे

शर्म हमें कुछ नहीं आती थी

कम खर्चे में काम चलाते थे

ट्यूशन हम पढ़ाते थे

अपना खर्चा निपटाते थे

शौक़ से करते रहते थे

वो भी एक जमाना था ।

पुरानी यादें है यादो का क्या ...

खुद के ट्यूशन की तो बात दूर थी

बताने में भी शर्म आ जाती थी

ढपोर शंख बोला जाता था

जो घर में ट्यूशन लगवाता था

छिप छिप कर पढ़ते रहते थे

नम्बर वन आने की

प्रतिस्पर्धा हम करते थे

किताबों में पीपल के पत्ते और

मोर के पंखे हम रखते थे

शुद्ध भावना से नत मस्तक होते थे

विद्या देवी आयेगी

याददाश्त मेरी बढ़ायेगी

पाठ याद हो जायेगा

ऐसी धारणा हम रखते थे

वो भी एक जमाना था !

पुरानी यादें है यादो का क्या ...

पैदल ही स्कूल जाना पड़ता था

साइकिल भी नहीं मिल पाती थी

दोस्त के साइकिल के डंडे

पर बैठा करते थे

पिछले कैरियर की सेवा लेते थे

जमकर घूमा करते थे

स्कूल भी ज़ाया करते थे

कैंची मारकर चलाना सीखा हमने

बीस बाइस इंच की साइकिल मिलती थी

क़द से हम छोटे लगते थे

पर फ़र्राटेदार भगाते थे

जमकर लुत्फ़ उठाते थे

पाठ याद जब नहीं करते थे

स्कूल में मुर्ग़ा बनना पड़ता था

पीठ पर ईंटें भी रखे जाते थे

लाल होने तक कान मरोड़ा जाता था

धूप में खड़े हम होते थे

स्कूल के दर्जनों चक्कर हम लगाते थे

मुंशी जी की छड़ी तोड़कर लाते थे

खुद भी हम पिट जाते थे

पर उफ़ कभी हम नहीं करते थे

स्कूल में जब पिटते थे

मौनी बाबा बन जाते थे

नहीं तो घर में भी पिटना पड़ता था

वो भी एक जमाना था ।

पुरानी यादें है यादो का क्या ...

बिना चप्पल जूते के गुल्ली

डंडा हम खेला करते थे

कोसो पैदल चलते रहते थे

स्कूल भी ज़ाया करते थे

पैरो मे काँटे चुभते रहते थे

काँटों से काँटे निकाला करते थे

पर घर पर नहीं बताते थे

डाँट खाने से हम डरते थे

स्कूल में चने चबैना ले ज़ाया करते थे

दोस्तों संग साझा करते थे

बाज़ार से कम्पट टाफी हम लाते थे

उसमें ही ख़ुश हो जाते थे

संयुक्त परिवार में हम रहते थे

बाँट बाँट कर खाते थे

प्यार से सबको गले लगाते थे

वो भी एक जमाना था ।

पुरानी यादें है यादो का....

स्वरचित रचना

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