प्रेम नापने की वस्तु कहाँ

प्रेम नापने की वस्तु नहीं, होता इक सुखद अहसास हैं

शंका का बीज न बोओ कभी, प्रेम चाहता विश्वास है

होती ग़लतियाँ है सभी से, कोई भी दूध का धुला नही

सही ग़लत उसे समझाओ, सुधरने की मिले आस है ॥

पत्नी हो जाये यदि रूठी, उसकी पसंद का ध्यान करें

प्रिय वस्तु यदि भेंट में दे दें, आत्मीयता का बोध करें

उपहार ऐसी चीज़ ही होती, सबके दिल की चाहत है

ज़्यादा कंजूसी न ही बरतें, संयम का व्यवहार करें ॥

मीठे बोल ही मन को भाये, आत्मीयता का बोध कराये

बिगड़ी बातें सब बन जाये, परम संतोष मन में आये

प्रेम बिना यह जीवन सूना, केवल दर दर भटकन है

प्रेम प्यासे भटकने वाले, कहीं जायें पर चैन न पायें ॥

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