प्रेम की बोली मुक्तक

मीठी बोली बहुत ही प्यारी काम बहुत यह करती है

क्रोध की बोली बहुत ही तीखी मिर्ची जैसी लगती है

बात बात में झल्लाना होता विवेक शून्यता का लक्षण

मृदुल बोली ही ऐसी होती बिगड़ी बात भी बनती है ।

अपनी बात को मनवाना पागलपन जैसी हरकत होती है

प्रेम ऐसा हथियार है जो दुश्मन को दोस्त बना देती है

मत पालें मन में परस्पर द्वेष और नफ़रत की भावना

आग को आग नहीं पानी ही तो केवल बुझा सकती है ।

पशु पक्षी भी समझते प्रेम की भाषा प्रेम प्रदर्शित करते हैं

प्रेम ही ऐसा इत्र है भाई सुगंध चहुँओर समान फैलती है

प्रेम और आनन्द ही है जीवन को भरपूर जीने का लक्षण

प्रेम और आस्था से ही परमात्मा से मिलन हो सकती है ।

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