सोच रहा हूँ, सुनो प्रिये
सोच रहा हूँ, सुनो प्रिये!
कुछ बात कह दूँ,
दिल की आज
जो मेरे मन भाये।
हर राह पर, हर मोड़ पर,
जीवन के हर छोर पर,
प्रिये! मैंने खड़ा पाया तुम्हें
तुम ही मुझे नज़र आये।
पाया तुम-सा हमसफ़र
सरल हुई जीवन डगर,
उड़ रहा हूँ मानो पंख धर,
जब साथ तुम्हारा पाये।
फूलों-सी मुस्कान लिये
हृदय में रच-बस गयी आप,
पुलकित पुष्पों के पथ पर
तुम ही मुझे नज़र आये।
मेरे गीतों में जो प्रेम बसा,
रोम-रोम में अंकित है,
जन्म-जन्म की यह गाथा है
गीत मिलकर हम गाये।
एक मधुर अनकही कामना
मेरे मन में सिसक रही:
मत छोड़ना कभी साथ मेरा,
संग तेरा ही मुझे भाये।
ख्वाब यही अंतिम मेरा
तू संग रहे जब तक मैं रहूँ,
हे मेरे जीवन की रागिनी!
देख तुझे दिल गीत गाये।
सोच रहा हूँ, सुनो प्रिये!
कुछ बात कह दूँ,
दिल की आज
जो मेरे मन भाये।