हम भारतीय

हम भारतीय

लाख कोशिश करो, मनाइए,

हम नहीं सुधरेंगे

हम भारतीय हैं।

चाय पिए, सामने डस्टबिन रखा है,

पर नहीं बाहर कुल्हड़ फेंक दिए।

पैदल चलना सड़क पर मुश्किल है,

चलते-चलते सामने ही थूक दिए।

जहाँ खाते हैं, वहीं फेंकते हैं,

डस्टबिन खाली बैठा मुस्कराता है।

सोचता होगा

“मुझे क्यों रखा है?

आख़िर मैं इनके लायक नहीं!”

डंडे के शासन से हम डरते हैं,

वरना हेलमेट से सिर में खुजली होती है।

सीट बेल्ट पहनने में आलस है,

कार रेड सिग्नल दे-देकर थक जाती है।

मेट्रो में बैठे नहीं थूकते,

भारी जुर्माना कौन देगा?

बाहर निकलकर किनारा ढूँढते,

किसी कोने में जाकर थूक दिए।

कोई दीवार, कोई कोना

हमारी पहुँच से बाहर नहीं।

मौका मिला तो

स्वच्छता अभियान को धता बता दिए।

शिक्षित–अशिक्षित सब एक जैसे,

एक ही मानसिकता वाले।

भ्रष्टाचार का समर्थन करते,

“जल्दी काम हो” कहकर

धीरे से जेब भारी कर दिए।

ऐसा नहीं कि समझते नहीं,

ज्ञानियों में हम अग्रणी हैं।

डायलॉगबाज़ी में तो

बड़े-बड़ों को पीछे छोड़ दिए।

पर जब भारतीय विदेश जाते हैं,

क़ानून का पूरा पालन करते हैं।

क्या करें, वहाँ जुर्माना भारी है

जीवन भर की कमाई

एक क्षण में खो दिए।

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