छठ पूजा

उषा की अरुणिमा छा गई, घाटों पर भक्ति का रंग,

सूर्य को अर्घ्य दे रहीं, माताएँ मन में उमंग।

संयम, श्रद्धा, सेवा से, होता यह पर्व महान,

छठी मइया का वरद हाथ, सब पर रखे पहचान।

जल में खड़ी अधरों पे भजन, नेत्रों में आस्था की रेख,

काँच की चूड़ियाँ झनक उठीं, जब गाया सूर्य का लेख।

प्रकृति भी झूमी साथ में, बजा सजीव का राग,

छठ का ये पावन अवसर, मिटा दे जीवन का दाग।

नदियों में दीप तैरते, गूंजे हर घाट पे गीत,

भक्तिनें धूप में तपतीं, मन में बस श्रद्धा प्रीत।

सूर्य देव मुस्काएँ जब, सुनें मइया की पुकार,

हर मन में भर जाए तब, नव जीवन का संसार।

डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया, उगते को भी प्रणाम,

ये परंपरा सिखाती है, जीवन का यह संदेश तमाम।

जो झुके विनम्रता से, वही पाए उजियारा,

छठ पर्व का यही तो सार, जीवन का है सहारा।

सज गए घाट, झूम उठा हर गाँव और नगर,

भक्ति की धारा बह रही, मन हो गया अमर।

छठ मइया की कृपा से, सुख-समृद्धि मिले अपार,

हर द्वार बजे मंगल-धुन, हर आँगन हो त्यौहार।

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