Prem
टूटा हुआ फूल
टूटा जब वह फूल डाली से स्वयम् के दुर्भाग्य को कोसा,कहाँ होगा अब वतन उसकान जाने अब आगे क्या होगा । अभी तक गुले गुलज़ार रहता था,चमकता था, महकता था, धूमिल हो गयी सब चमक उसकी,न जाने अब आगे क्या होगा । अर्पित हो जाता वह प्रभु कोजीवन धन्य उसका होता, नियति में लिखा क्या … Read more
सानिध्य
सानिध्य प्रभु का जब मिलता है वरदान स्वरूप यह होता है,गोवर्धन पर्वत भी प्रभु उठाते हैं ब्रजवासियों की इन्द्र कोप से रक्षा करते हैं ।सानिध्य बड़ों का जब मिलता है,आशीर्वाद स्वरूप यह होता है,हर कदमों पर सफलता मिलती है, आकाश की बुलंदियों को छू लेते हैं ।सानिध्य जीवन में ज़रूरी है, सुरक्षा कवच का काम … Read more
प्रेम की परिभाषा
प्रेम है आकर्षण प्रेम है दिव्य शक्तिप्रेम है ज्योति प्रेम है जीवन का श्रृंगार प्रेम बिना है जीवन सूना प्रेम है सृष्टि का आधार ।प्रेम ही दर्शन प्रेम ही ईश्वर प्रेम ही है मेरे अन्तर्मन का भाव प्रेम नहीं तो जन्म निर्थक होता जीवन मे सर्वथा अभाव ।दृष्टि पशु पक्षी पर डाले देते प्रेम का … Read more