उठो द्रौपदी वस्त्र सँभालो
उठो द्रौपदी वस्त्र सँभालो चक्र धारी अब नही आयेंगेतुम्हीं को लेना होगा लोहा इन नरभक्षी इंसानों से ।छोड़ो मेंहदी भुजा सँभालो खुद ही चीर बचाओ अपनीबन जाओ तुम रण चंडी भिड़ जाओ अब तूफ़ानों से ।कब तक आस लगाओगी कृष्णा पुकार पर दौड़े आयेगे यह तो द्वापर युग नही है न ही रथी अब महाभारत … Read more