कल तक खुश थे

🌿 कल तक खुश थे 🌿

कल तक खुश थे,

आज कहानी बन गये।

वाह रे जिन्दगी!

तुझे क्या कहें?

कहीं फ्लाइट गिरी, कहीं हेलीकॉप्टर,

कहीं गिरे बम के गोले।

मानवता चीत्कार कर रही,

मृत्यु बुला रही धीरे-धीरे।

डीएनए टेस्ट करा दो,

श्रद्धांजलि दे दो।

दो-चार आंसू बहा लो,

संवेदनाएँ व्यक्त कर लो।

इंतजार कर रहे घर में बच्चे,

इंतजार कर रहे बूढ़े माँ-बाप।

वो नौनिहाल, जो नहीं जानते,

मृत्यु कैसी होती है।

चेहरों पर आंसू की बूंदें,

दिल में वेदना की गहराई।

कैसे उबर पाएँगे वे,

जब चीत्कार करती है पीड़ा इतनी भारी।

कल तक खुश थे,

आज कहानी बन गये।

वाह रे जिन्दगी!

तुझे क्या कहें?

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