नवागंतुकों का न तिरस्कार करो

🌿 आड़ा-तिरछा लिखने दो 🌿

आड़ा तिरछा लिखने दो,

जो लिख रहे हैं उन्हें लिखने दो।

प्रयास की ज्योति जलने दो,

मन की कलम को चलने दो।।

जो मौन रहे, जो चुप बैठे,

उनसे ये तो बेहतर हैं।

कच्चे शब्दों में भी दे जाते,

संदेश नये ये सुंदर हैं।।

कभी डाले काटेंगे अपनी,

कभी गिरेंगे गिरते फिर उठेंगे।

सतत साधना से ही तो,

लेखन के दीपक चमकेंगे।।

सूर-कबीर न सब बन पाएँ,

कुछ कालिदास भी आएँगे।

माँ सरस्वती जब कृपा करेगी,

महा काव्य रच पाएँगे।।

एक दिन में न कवि बनेंगे,

न महाग्रंथ रच पाएँगे।

धैर्य भरो, आशीष भरो,

सृजन पथ पर बढ़ते जाएँगे।।

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