हम भारतीय

हम भारतीयलाख कोशिश करो, मनाइए,हम नहीं सुधरेंगेहम भारतीय हैं।चाय पिए, सामने डस्टबिन रखा है,पर नहीं बाहर कुल्हड़ फेंक दिए।पैदल चलना सड़क पर मुश्किल है,चलते-चलते सामने ही थूक दिए।जहाँ खाते हैं, वहीं फेंकते हैं,डस्टबिन खाली बैठा मुस्कराता है।सोचता होगा“मुझे क्यों रखा है?आख़िर मैं इनके लायक नहीं!”डंडे के शासन से हम डरते हैं,वरना हेलमेट से सिर में … Read more

यशोधरा की वेदना

प्रियतम ! क्या क़ुसूर था मेरा भोर में चुपके से छोड़ कर निकल चले ।मैं आपकी यशोधरा हूँ आपकी अर्द्धांगिनी हूँ, आपका संबल हूँ मैं, आपके सत्य मार्ग में बाधक नहीं, क्या दोष था आखिर मेरा चुपके से मुझे छोड़ कर निकल चले ।शपथ ली थी पवित्र अग्नि के समक्ष सात जन्मों तक साथ निभाने … Read more

जिम्मेदारी की पुकार

कुछ कर ले भाई, सोता न रह,ज़िम्मेदारी तेरे सिर पर है।समय था लिखने-पढ़ने का,भाग रहा था इधर-उधर।ज़िम्मेदारी पढ़ाई में न समझी,लाता था केवल सिफ़र।ज़िम्मेदारी आयी कमाने की,आलस्य में पड़ा सोता है।बिना परिश्रम के कुछ नहीं मिलता,कर्म करना पड़ता है।पड़ा-पड़ा घर में सोता है,भाग्य को अपने कोस रहा।कर्म बदलता है भाग्य को,इसे क्यों तू नहीं समझ … Read more

धरती की चेतावनी

धरती की चेतावनीधरती हिल रही है,पर हम बेख़ौफ़ हैं,व्यंग कर रहे “ये होता है!”पूँछते “कितने रिक्टर की तीव्रता थी?”छः से नीचे थी?अच्छा, तो बात नहीं,ये घातक नहीं!चुप हो जाते हैं,सोचते “ये होता रहता है”नहीं समझना चाहते ये एक चेतावनी है प्रकृति की ओर से!हे मूर्ख मानव!संभल जा ज्यादा अत्याचार मत कर!!पर मानव तो महा ज्ञानी,बड़े-बड़े … Read more

ऊं जय शिव शंभु

ऊं जय शिव शंभु !!! ऊं जय शिव शंभु !!गूंज है आपके नाम की हर ओर हे भोले नाथ।उमा संग हैं राजते गिरिजापति पशुपतिनाथ ॥ऊं जय शिव शंभु !! ऊं जय जय शंभु !!भक्त आपके मस्त हैं कर रहे हैं जय जयकारा कांवड़ियों का शोर है बम बम बम का है नारा ।ऊं जय शिव … Read more

हेल्थकेयर व्यंग्य

ग्राहक अस्पताल में पहुँचता है,पार्किंग में गाड़ी खड़ी करते हीइलाज शुरू हो जाता है।जितनी बड़ी गाड़ी,उतना बड़ा रोग,और उतनी ही बड़ी फ़ीसवैज्ञानिक सिद्धांत है जनाब!अंदर घुसते ही“मे आई हेल्प यू”ऐसी मुस्कान बिखेरता है,जैसे आपकी बीमारी नहीं,आपकी लिमिट देखकर खुश हुआ हो।आजकल बीमारी नहीं,ग्राहक अस्पताल पहुँचता है,नब्ज़ बाद में देखी जाती है,पहले पूछा जाता हैमेडिकल इंश्योरेंस … Read more

मित्र और माँ

एक मित्र ने दूसरे से कहा –“हेलो दोस्त! क्या हाल चाल है?बहुत दिनों बाद मिले यारआओ बैठ कर कुछ गपशप करें,कुछ पुरानी बातें याद करें।”घर में मन कहाँ लगता,दिन भर चिक-चिक में ही दिन बीतता।दोनों बैठ गए पास के पार्क में,एक बेंच पर, पुराने दोस्त।बहुत छनती है जब मिल बैठते हैं,पुरानी गपशप, पुरानी यादें।अचानक एक … Read more

अन्नदाता किसान की पुकार

जोत रहा था वह खेतों को,धरती से सोना पाने को।गर्मी में तपता वह,परिवार की भूख मिटाने को।आधे तन पर कपड़ा, फटा पुराना,केवल इज्जत बचाने को।दो जून की रोटी पाने का ठिकाना नहीं,जो विधना उपलब्ध, उसी में भूख मिटाने को।कर्ज के बोझ तले पिसता,सूद पर सूद चढ़ता जाता।उगाही दूत जब घर में आता,चुपके से खिसक जाता।गरीब … Read more

अंतरमन की दुविधा भजन रूप

देखता हूँ जब सामने, पाता हूँ अपनों को खड़ा।कैसे कहूँ तुम मेरे शत्रु हो, मन दुविधा में पड़ा।अपने ही हैं सब सुहृद, अपने ही तो सब रक्त हैं।कैसे कहूँ तुम मेरे शत्रु हो, मन दुविधा में पड़ा।सारी त्वचा मेरी जल रही, मन मेरा भ्रमित हो चला।शिथिल हो गये सब अंग, किंकर्तव्यविमूढ़ मैं खड़ा।न विजय की … Read more

मोबाइल मेरी सौतन

अब बहुत हो गया,आज तुम्हें मैं फेंक आऊँगी,निश्चित ही कूड़ेदान में।तू मेरी सौतन हो गई,बहुत मुझे सताती है।कहती हूँ, जब कोई काम उन्हें,तू बीच में कूदकर आती है।हाँ, आज तुझे मैं नहीं छोड़ूँगी,फेंक आऊँगी कूड़ेदान में।जबसे तू मेरे घर आयी,जीवन में मेरे विपदा लायी।तुझमें ही ये चिपके रहते हैं,तुझे साथ-साथ चिपकाये रहते हैं।तू मेरे फ़िल्म … Read more