गतिविधियों का मत बनो दास
कुछ हास करो
कुछ परिहास करो
जीवन की आपाधापी से
समय निकालो कुछ अपने लिए !
मत बनाओ जटिल जीवन को
सरल सुगम
जीवन शैली अपनाओ
विश्लेषण जीवन का बंद करो
जीवन जिओ परमार्थ के लिए !
मत सोचो कभी अपने मन में
तू ही इक कर्ता है
तू तो है इक निमित्त मात्र
संचालन ऊपर वाले से चलता है
समय निकालो संकीर्तन के लिए !
चमको जग में हीरा बनकर
धीर, वीर, संघर्षशील
मत डरो कष्ट क्या होगा
पत्थरों की रगड़ से
तुझे तराशने के लिए !
झांको तो अपने भीतर झांको
आख़िर क्या तेरी मंज़िल
झाँकोगे यदि तुम इधर उधर
दोषी क्यों है अन्तर्मन
तेरी कुत्सित दृष्टि के लिए ।
जो बीत गया सो बीत गया
ठहरा वह तो अतीत
चिंता इसकी व्यर्थ करे
फूलों जैसा जीवन हो
हर क्षण मुस्कान के लिए ।