हाथ की लकीरें

ऐ मानव! ग़ुरूर न करना,

जन्म से पहले लिख दी पहचान।

तुझसे पहले ही तय हो चुका,

तेरे जीवन का कुछ विधान।

तू इन रेखाओं का बंधन है,

इनके बिना न कोई अस्तित्व।

पढ़ सके तो पढ़ ले भाषा ये,

तीनों काल का गुप्त संकेत।

तेरी जन्मकुंडली यही है,

मिटती नहीं ये रहस्यमयी छाप।

गहराई तक अंकित पहेली,

जिसका न कोई पा सका माप।

आत्मा का दर्पण ये रेखाएँ,

दिव्य योजना का उजला रंग।

ब्रह्मांड और कर्म की कथा,

छुपी है इनके हर प्रसंग।

घुमाव, शाखा, वृत्त की भाषा,

अदृश्य कोड की जादू-रेखा।

त्वचा पर छपी अमिट छवि,

मृत्यु तक साथ निभाए ये रेखा।

न कोई यंत्र, न कोई विज्ञान,

न कोई कृत्रिम बुद्धि महान।

बदल सके इन अद्भुत निशानों को,

सिवा उसी सृष्टिकर्ता के, महान।

उभरती जाती अदृश्य तरंग-सी,

देती संकेत अलौकिक शक्ति।

जब विज्ञान थक कर रुक जाता,

अध्यात्म दिखाता अपनी भक्ति।

ईश्वर की भाषा ये रेखाएँ,

सर्वोच्च चेतना का प्रमाण।

भारतीय दर्शन की ज्योति हैं ये,

परब्रह्म के अमर हस्ताक्षर महान।

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