दिल की बात दिल से

आओ बैठे दिल से दिल की बात करते हैं

भूल जायेगे हम जहां जब दो दिल आ मिलते हैं ।

कुछ बात तो ऐसी करें दिल को मेरे भा जाये

ये दिल ही तो है क्यों न दिल से दिल मिल जाये ।

सबसे दिल की बातें तो हम नहीं करते

जिससे ये दिल मिलता है उससे बातें करते हैं ।

बरसोँ बीत गए कब तक मुझे तरसाओगी

ये दिल जब टूट जायेगा कैसे फिर जोड़ पाओगी ।

दिल बहुत नाजुक होता है झटके में टूट जाता है

ये मरम्मत की वस्तु नही, न ही नया दिल मिल पाता है ।

दिल से दिल जब मिलता है सुखद अहसास होता है

लगता जन्नत तुम ही हो फिर क्यूँ जन्नत की तलाश करें ।

जाने दो उनको अपनी राह जो दिल तोड़ जाते हैं

बहकावे में हैं वे कि जन्नत कहीं ऊपर मिलती है ।

मत देखो झूठे सपने ज़िन्दगी खुदा की देन होती है

इसे भरपूर जिओ दिल कभी मत तोड़ो ।

ये सृष्टि ऐसे नहीं बनी दिल से दिल का संगम था

मनु और शतरूपा को भूल गए वे भी दिल से मिलते थे ।

दिल को जिसने तोड़ा सुकून उसे नहीं मिला

सुकून तो मिला हीर रांझा को जो साथ साथ-साथ मरे ।

सुकून मिला लैला मजनू को भले ही पत्थर खाये,

मरते मरते दोनो ने दिल से साथ रहने की कसमें खाये ।

सुकून मिला उन वीरों को जो फाँसी पर लटक गए

शहीद होते होते धरती माँ की दिल से जयकारा गाये ।

आओ बैठे दिल से दिल की बात करते हैं

भूल जायेगे हम जहां जब दो दिल आ मिलते हैं ।

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