चूड़ामणि गीत रूप
सागर में हलचल जगी, निकले रत्न हजार वहीं जन्मी चूड़ामणि, न्यारी थी उपहार ॥ ×2नन्दिनी हुई मोहित हरि पर, बढ़ा प्रेम अपार,सागर ने अर्पण में दी थी, मणि अमर उपहार।इन्द्र देख रह न पाए, चितवन में अनुराग हरि ने देकर इन्द्राणी को, किया अतिथि सत्कार ॥🔸 दोहराव: सागर में हलचल जगीशम्बर रण में संकट छाया, … Read more