चूड़ामणि गीत रूप

सागर में हलचल जगी, निकले रत्न हजार वहीं जन्मी चूड़ामणि, न्यारी थी उपहार ॥ ×2नन्दिनी हुई मोहित हरि पर, बढ़ा प्रेम अपार,सागर ने अर्पण में दी थी, मणि अमर उपहार।इन्द्र देख रह न पाए, चितवन में अनुराग हरि ने देकर इन्द्राणी को, किया अतिथि सत्कार ॥🔸 दोहराव: सागर में हलचल जगीशम्बर रण में संकट छाया, … Read more

ऐसा मित्र कहाँ से लाऊँ

ऐसा मित्र कहाँ से लाऊँ ✍️ऐसा मित्र कहाँ से लाऊँऐसा मित्र कहाँ से लाऊँजो मेरा चावल खा जाएपाँव पखारे आँसुओं सेबिन माँगे सबकुछ दे जाएऐसा सखा कहाँ से पाऊँऐसा मित्र कहाँ से लाऊँ॥पाँव के छाले देख-देख कर, अपने आँसू से पग धोता हो,कृष्ण-सा मुझ पर स्नेह लुटाए, मन की बात समझता हो।कृष्ण-सुदामा जैसी मैत्रीकहाँ भला … Read more

भजन राम आयेंगे

भजन : “राम आयेंगे राम आयेंगे राम आयेंगे आयेंगे राम आयेंगे,धरती पर जब-जब अधर्म बढ़ेगा, राम आयेंगे।।जब-जब संकट छाया जग पर, प्रभु ने रूप सँवारा है,हर युग में रघुवर ने आकर, धर्म का दीप उजारा है।सत्य यही हैसृष्टि बदले पर, राम सदा ही आयेंगेराम आयेंगे आयेंगे राम आयेंगे।।परमधाम का क्षण जब आया, राम ने सहज … Read more

मेरे मन की बात

कभी-कभी पीछे मुड़कर देखता हूँ,तो लगता हैमेरे जीवन की पगडंडी परकितनी धूप बिखरी, कितनी परछाइयाँ चलीं,कितनी हँसियाँ खिलीं और कितने आँसूचुपचाप मेरी पलकों पर मोती बनकर सूख गए।बचपनवह जैसे हवा का एक झोंका थाछूकर भी न पकड़ में आता।मिट्टी में खेलते हुए जो हँसी गिरे थे,वे आज भी दिल के किसी कोने मेंधड़धड़ाते दिल की … Read more

राम सिया विवाह भजन

जनकपुर में आज सजा है, मंगल सुंदर धाम।राम-सिया के दिव्य मिलन का, गूँजे जय श्रीराम॥बोलो राम बोलो राम बोलो राम सियाराम..मिथिला की धरती पर छाया, स्वर्ग-सा अनुपम वैभवरंग-बिरंगे पुष्प बरसते, गंध भरी मधुर-सुगंध-रव, हर गली में दीप जले थे, हर आँगन में थी मुस्कानदेख जनकपुरी बोल उठी बोलो जय जय श्री राम । राजा–महाराजा सब … Read more

फ़ाइनल दोहों की श्रृंखला

फ़ाइनल किये गये दोहे – प्रकाशन हेतु (ये दोहे दिनेश जी ने चेक कर लिये हैं )माँ सरस्वती – दोहे की माला शब्द-शब्द है ब्रह्म जो, माँ वाणी की देन।मन-मंदिर में गढ़ लिखूँ, हो जाए मन-चैन॥वीणा नाद जहां बजे, झर-झर बरसे ज्ञान।जिस पर दे शुभ दृष्टि माँ, बनते वही सुजान॥माँ की वीणा दिव्य है, देती … Read more

नन्हें मन के फूल

नन्हे मन के फूल तुम्हीं हो, मुस्कानों के धूल तुम्हीं हो।रंग–बिरंगी दुनिया अपनी, उसकी सबसे मूल तुम्हीं हो।नन्हे मन के फूल तुम्हीं होकूदो–फाँदो, खेलो–कूदो,आँगन को तुम रौशन कर दो।प्यारी-प्यारी हँसी तुम्हारी,सबका थका हुआ मन हर दो।तुमसे ही है घर में उजियारा,तुमसे खुशियों की धारनन्हे मन के फूल तुम्हीं होपुस्तक खोलो, ज्ञान सँजो लो,सपनों को ऊँचा … Read more

माना कि अब बड़े हो गये

माना कि हम बड़े हो गए,पर बचपन अभी तो ज़िन्दा है।सफ़ेद हुए इन बालों के पीछेएक नन्हा परिंदा ज़िन्दा है॥वो मिट्टी में खेलना अपना,वो पेड़ों पर चढ़ जाना;नदी किनारे कंकड़ चुनकरथैले में भर घर ले आना।गली-मोहल्ले में खेल-कूद,नंगे पाँव भाग निकल जानाधीमी हुई कदमों की रफ़्तार,पर मन की चाल अभी ज़िन्दा है।माना कि हम बड़े … Read more

बदलते समय का पालन पोषण

पहले बच्चों का पालन-पोषणसंवेदना और सादगी का संगम था जहाँ ज़रूरतें सीमित थीं,पर अपनापन असीम।आज का पालन-पोषणसुविधाओं की सूची बन गया है।बच्चा पैदा होते ही बीमा चाहिए,महँगे खिलौनों से भरा कमरा चाहिए,ए.सी. वाला नर्सरी रूम,हर त्योहार पर नया परिधान,और स्कूल की फ़ीस लाखों में मापी जाती है।अब बचपन भी ब्रांडेड हो गया है।हमारे समय में … Read more

मत डरा मुझे हे मृत्यु काल

मत डरा मुझे हे मृत्यु-काल !! मत डरा मुझे हे मृत्यु-काल,मैं अजर हूँ, अमर हूँ, निडर बेहाल।तेरा शासन तन तक सीमित,मैं आत्मा हूँ असीम विशाल।।तू क्या मुझे मिटा सकेगा, मैं तो सत्य की ज्वाला हूँ।भस्म भले यह देह हो जाए,पर मैं हरि का उजियाला हूँ।।शक्ति हूँ मैं, शिव का अंश हूँ, मुझमें जीवन का संचार।मृत्यु … Read more